‘एक RSS के मंत्री गए, दूसरे को ले आए’: प्रल्हाद जोशी बने शिक्षा मंत्री, नियुक्ति पर भड़के दीपांकर भट्टाचार्य

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा मंत्रालय को प्राथमिकता नहीं दी और फिर से आरएसएस से जुड़े नेता को जिम्मेदारी सौंप दी। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही का उदाहरण बताते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

नई दिल्ली

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े नेता को ही शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है।

दीपांकर भट्टाचार्य ने एएनआई से कहा, “प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। यह उनके पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में आया है। वह पहले से उपभोक्ता मामले, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के साथ खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं। इससे एक बात साफ हो जाती है कि मोदी सरकार के लिए शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। उन्हें एक मंत्री की जरूरत थी, इसलिए किसी एक मंत्री को यह जिम्मेदारी दे दी। आरएसएस के एक मंत्री गए तो फिर आरएसएस के ही एक मंत्री को ले आए।”

भाजपा ने किया फैसले का बचाव
वहीं, तेलंगाना विधानसभा में भाजपा विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का बचाव करते हुए कहा कि यह फैसला जवाबदेही के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
रेड्डी ने कहा, “यूपीए सरकार के दौरान 72 बार प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उस समय यूपीए सरकार ने एक बार भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। आप चुनाव नहीं जीत सकते, इसलिए खबरों में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दे उठाते हैं। राहुल जी, आप युवाओं को गुमराह क्यों करते हैं और उनके भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों करते हैं?” उन्होंने आगे कहा, “हमारे नेताओं का मूल मंत्र है- ‘राष्ट्र पहले, पार्टी बाद में
और स्वयं सबसे अंत में।’ यही कारण है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देकर देश के सामने एक उदाहरण पेश कर रहे हैं।”

प्रल्हाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। प्रभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि वह नई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ करेंगे। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझ पर भरोसा जताते हुए इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मैं पूरी विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ इस दायित्व का निर्वहन करूंगा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में मैं पूरी ईमानदारी से काम करूंगा और इस मंत्रालय में उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगा।”

धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ में क्या बोले प्रल्हाद जोशी?
जोशी ने धर्मेंद्र प्रधान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू किया और पिछले चार-पांच वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उन्होंने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की और कई महत्वपूर्ण पहल कीं। नई शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करूंगा और पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाऊंगा।”

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे थे। प्रधान का इस्तीफा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर संसद में लगातार कार्यवाही स्थगित कराने की कोशिश कर रहे थे।

इस्तीफे देकर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि उन्होंने छात्रों के हित में और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन का इस्तेमाल “राष्ट्रविरोधी ताकतों” द्वारा न किया जा सके, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि सरकार ने शिक्षा परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मांगों पर बातचीत की है और उन्हें स्वीकार किया है।