OPINION: चेहरे बदलते हैं, फैसलों में फेरबदल होता है पर PCB की कहानी नहीं बदलती, खिलाड़ियों पर गिरी गाज, पर अधिकारियों से सवाल नहीं

खेल

pak cricket controversey: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने जो कुछ किया है, उससे वह अपने खिलाड़ियों को आखिर क्या संदेश दे रहा है? पाकिस्तान के दूसरे खिलाड़ियों के लिए क्या संदेश है? दुनिया भर के कोचों के लिए क्या संदेश है और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने प्रशंसकों के लिए पाकिस्तान क्या संदेश देना चाहता है? खिलाड़ियों को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है. कोचों को हटा दिया गया है लेकिन अधिकारियों का क्या

 

नई दिल्ली.
हार और जीत खेल का हिस्सा है पर जिस तरह से सीरीज के बीच पाकिस्तान ने जिस तरह से घबराकर फैसले लिए हैं, वह हैरान करने वाला है इंग्लैंड दौरे के बीच उन्होंने सात खिलाड़ियों को घर भेज दिया. कोचिंग स्टाफ को हटा दिया गया और खिलाड़ियों को सबक सिखाने की कोशिश की गई लेकिन सवाल यह है कि आखिर किस बात का उदाहरण पेश किया जा रहा है? क्या यह खिलाड़ियों के प्रति अनादर और अपमान का उदाहरण है? या फिर उन्हें नीचा दिखाने और उनके साथ बदसलूकी का?

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने जो कुछ किया है, उससे वह अपने खिलाड़ियों को आखिर क्या संदेश दे रहा है? पाकिस्तान के दूसरे खिलाड़ियों के लिए क्या संदेश है? दुनिया भर के कोचों के लिए क्या संदेश है और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने प्रशंसकों के लिए पाकिस्तान क्या संदेश देना चाहता है? खिलाड़ियों को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है. कोचों को हटा दिया गया है लेकिन अधिकारियों का क्या? उनके बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं? यह सुविधाजनक चुप्पी क्यों? उनकी जवाबदेही तय क्यों नहीं होती? ऐसा कैसे हो सकता है कि उनसे कोई सवाल ही न पूछा जाए और वे ऐसे काम करते रहें जैसे कुछ हुआ ही नहीं?
बलि का बकरा खिलाड़ी क्यों?
सच्चाई यह है कि खिलाड़ी सबसे आसान निशाना होते हैं उन्हें बलि का बकरा बनाना आसान होता है. उनके साथ किसी भी तरह का व्यवहार कर लिया जाता है और फिर भी कोई सवाल नहीं उठता. जब आपके पास सत्ता होती है और किसी के करियर को नुकसान पहुंचाने की ताकत होती है, तो कोई आपकी अथॉरिटी पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं करता. पाकिस्तान क्रिकेट की स्थिति इससे खराब शायद ही हो सकती है. अहंकार, रवैया और सत्ता का दंभ पाकिस्तान क्रिकेट ही नहीं, बल्कि वहां का खेल जगत भी इन तमाम चीजों का शिकार हो चुका है. दुर्भाग्य से खेल प्रशासन में बैठे लोगों के भीतर भी वही प्रवृत्तियां दिखाई दे रही हैं, जो राजनीतिक वर्ग में देखने को मिलती हैं.
एक हार से खिलाड़ी खराब कैसे?
मैं एक पल के लिए भी यह नहीं कह रहा कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है या उन्होंने अच्छा नहीं खेला लेकिन अगर ड्रेसिंग रूम में यह बातें पहुंच रही हों कि बोर्ड मैच और पूरी सीरीज का बहिष्कार करने की धमकी दे रहा है, तो ऐसे में खिलाड़ी किस मानसिक स्थिति में मैदान पर उतरेंगे? वे अपना पूरा ध्यान क्रिकेट पर कैसे लगा पाएंगे? सलमान अली आगा का उदाहरण ही ले लीजिए उन्हें अचानक पहले टेस्ट में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया इसके बाद दूसरे टेस्ट से उन्हें बाहर कर दिया गया और अब तीसरे टेस्ट से पहले उन्हें घर भेज दिया गया. कम से कम कहने के लिए भी यह हास्यास्पद है इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में सिर्फ एक टेस्ट मैच के आधार पर आप किसी खिलाड़ी का आकलन कैसे कर सकते हैं? वह भी तब, जब उसे आखिरी समय पर कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई हो क्या किसी खिलाड़ी को खुद को साबित करने के लिए इतना ही मौका दिया जाना चाहिए?
अंधकार में जाता पाक क्रिकेट का भविष्य 
पाकिस्तान में लंबे समय से ऐसी चीजों को नजरअंदाज किया जाता रहा है. लंबे समय से खिलाड़ी और कमेंटेटर भी चुप्पी साधे रहे हैं लेकिन अब पहली बार प्रभावशाली लोग इस मुद्दे पर आवाज उठाते दिखाई दे रहे हैं यह देखकर अच्छा लगा कि जाने-माने पत्रकारों ने भी खिलाड़ियों के साथ किए जा रहे इस व्यवहार पर सवाल उठाया. आवाज उठाना जरूरी है, क्योंकि आखिर में इस पूरे घटनाक्रम में नुकसान सिर्फ और सिर्फ खेल का होता है. जरा इन खिलाड़ियों के बारे में भी सोचिए. वे अपमान और शर्मिंदगी के साथ घर लौट रहे हैं और उनके सामने अपना भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है.
युवा खिलाड़ियों को क्या संदेश दे रहा है पाकिस्तान 
इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण उन खिलाड़ियों के बारे में सोचिए जो अब इंग्लैंड जाने वाले हैं. उनके पास परिस्थितियों के अनुकूल ढलने का समय नहीं होगा. उन्हें वहां के हालात को समझने और खुद को तैयार करने का भी पर्याप्त मौका नहीं मिलेगा. ऐसे में आप उनसे यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि वे पूरी स्थिति को बदल देंगे? जब टीम मानसिक रूप से पहले ही टूट चुकी हो, तो नए खिलाड़ियों से अचानक आकर हालात पलटने की उम्मीद करना कितना उचित है?लेकिन शायद यही पाकिस्तान क्रिकेट की कहानी है बहुत कुछ बदलता है, चेहरे बदलते हैं, फैसले बदलते हैं, लेकिन कहानी नहीं बदलती.