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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी लाखों लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हो रहे हैं. मुंबई में प्रदूषण के खतरनाक हालात पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई पुलिस पर सख्त टिप्पणी की है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा- अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं? 26 अक्टूबर को कमिश्नरों को तलब कर मांगी रिपोर्ट.
मुंबई.
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने मुंबई की हवा की स्थिति पर हैरानी जताते हुए सवाल किया कि जब लाखों लोग प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, तब इसे नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं? अदालत ने मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए जाने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और मुंबई पुलिस को भी फटकार लगाई.
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिश गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ मुंबई में ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी. यह मामला अदालत ने संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुना. इस दौरान अदालत ने प्रदूषण रोकने के लिए जारी निर्देशों के पालन में कथित लापरवाही पर सवाल उठाए.
बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त आदेश
हाईकोर्ट की चिंता सिर्फ पटाखों और शोर तक सीमित नहीं रही. अदालत ने हवा में बढ़ते प्रदूषण, धुंध और दृश्यता में गिरावट का भी जिक्र किया. मंगलवार को दृश्यता 500 मीटर से नीचे चले जाने पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) देखने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए.
‘शॉकिंग’ है मुंबई में प्रदूषण की स्थिति
मुंबई की वायु गुणवत्ता को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश के बड़े शहरों में प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है. अदालत ने मुंबई में प्रदूषण की स्थिति पर हैरानी जताई और सवाल किया कि जब बड़ी संख्या में लोग खराब हवा से प्रभावित हो रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीरता से कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं.
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल नियम और आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है. उनका जमीन पर प्रभावी तरीके से पालन होना भी जरूरी है. मुंबई और दिल्ली के प्रदूषण की तुलना के संदर्भ में अदालत की चिंता ने शहरी प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
BMC, MPCB और मुंबई पुलिस को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने BMC, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए. अदालत की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जारी निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया.
अदालत ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकती है. पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासनिक लापरवाही को नागरिकों के अधिकारों के संदर्भ में गंभीरता से देखा जाना चाहिए.
संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है. स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण का सवाल भी जीवन के अधिकार से जुड़ी न्यायिक व्याख्याओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
मुंबई पुलिस कमिश्नर को सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अपने आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर को सभी पुलिस थानों के प्रभारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया. अदालत चाहती है कि पुलिस स्तर पर जवाबदेही तय हो और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने तथा ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की है. BMC कमिश्नर और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कमिश्नर को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है. इससे संबंधित अधिकारियों को अदालत के सामने यह बताना होगा कि प्रदूषण रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई और जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
