ट्रंप के लिए पाकिस्तान में इमरजेंसी? खैबर पख्तूनख्वा की खदानों पर नजर, क्या बिकेगी 7 ट्रिलियन डॉलर की दौलत?

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Pakistan Khyber Pakhtunkhwa Minerals: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू होने के बाद वहां के खनिज संसाधनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इमरान खान की पार्टी PTI की चुनी हुई सरकार को शहबाज शरीफ ने भंग कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने विदेशी कंपनियों को निवेश का न्योता दिया है. सवाल उठता है कि क्या खैबर पख्तूनख्वा के खनिजों को बेचने के लिए सरकार भंग की गई थी. इमरान खाने के पार्टी वाली इकलौती सरकार गिरने से पहले अमेरिका ने भी पाकिस्तान के खनन क्षेत्र को मजबूत करने में मदद की बात कही थी.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य में इमरजेंसी लागू होने के बाद अब वहां के खनिज संसाधनों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. 11 अक्टूबर को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की चुनी हुई राज्य सरकार को भंग कर दिया गया. सरकार ने इसके पीछे बिगड़ते सुरक्षा हालात को वजह बताया. राज्य में गवर्नर रूल लागू हो गया. लेकिन इस फैसले के कुछ ही दिन बाद राज्य के गवर्नर ने विदेशी कंपनियों को खनिज निकालने और बेचने के लिए निवेश का न्योता दिया. इससे पहले अमेरिका भी पाकिस्तान के खनन क्षेत्र को विकसित करने में मदद की बात कह चुका था. सवाल उठ रहा है कि क्या सच में सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं थीं या फिर जानबूझकर सरकार गिराई गई ताकि खनिजों पर कब्जा किया जा सके. इन घटनाओं के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच खनिज संसाधनों को लेकर कथित वादों की चर्चा भी हो रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान के खनिजों को लेकर कोई बड़ी योजना बन रही है?

अमेरिका ने पाकिस्तान को मदद की बात कही

1 अक्टूबर को पाकिस्तान में अमेरिकी मिशन की प्रभारी नताली ए. बेकर ने वहां के खनन उद्योग को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार पाकिस्तान के खनन क्षेत्र को मजबूत करने में मदद कर रही है. यह बयान खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू होने से कुछ दिन पहले आया था. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के खनिज संसाधनों की अनुमानित कीमत करीब 7 ट्रिलियन डॉलर है. यह बहुत बड़ी रकम है. हालांकि, जमीन के नीचे मौजूद खनिजों की अनुमानित कीमत और उन्हें निकालकर बेचने से होने वाली कमाई में फर्क होता है. खदानों को बनाना, खनिज निकालना और उन्हें बाजार तक पहुंचाना महंगा काम है. इसलिए इन संसाधनों से असल में कितनी कमाई हो सकती है, यह अभी साफ नहीं है. इसी बीच आरोप लगाए गए हैं कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने ट्रंप को पाकिस्तान के खनिज देने का वादा किया था. व्हाइट हाउस में जब ट्रंप से मिलने के लिए आसिम मुनीर पहुंचे थे, तो वह एक ब्रीफकेस ले गए थे, जिसमें कई तरह के खनिजों के सैंपल थे.

खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी क्यों लगाई गई?

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का एक प्रांत है. यहां इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार थी. 11 अक्टूबर को यहां अचानक इमरजेंसी लागा दी गई. सरकार को हटा दिया गया. पाकिस्तान की संघीय सरकार ने इस फैसले के पीछे सुरक्षा का हवाला दिया. उसका आरोप है कि राज्य में हालात बिगड़ रहे थे और प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में ठीक से सहयोग नहीं कर रहा था. दूसरी ओर, PTI ने इस दलील को खारिज कर दिया. पार्टी ने इमरजेंसी को राजनीतिक मकसद से उठाया गया कदम बताया. अब इस फैसले को खनिज संसाधनों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. सवाल है कि क्या राज्य सरकार को सिर्फ इसलिए हटाया गया ताकि गवर्नर रूल के जरिए विदेशी कंपनियों के लिए खदानें खोली जा सकें.

गवर्नर ने विदेशी कंपनियों को बुलाया

इमरजेंसी लागू होने के कुछ दिन बाद खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने बड़ा ऐलान किया. घरेलू और विदेशी कंपनियों को राज्य के खनिज क्षेत्र में निवेश करने का न्योता दिया. पेशावर में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में खनिजों की भरपूर मात्रा है. इन्हें निकालकर बेचने से लोगों को रोजगार मिल सकता है और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है.
कुंडी ने विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी का समर्थन किया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई अंतरराष्ट्रीय कंपनी पाकिस्तानी कंपनियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करती है, रोजगार देती है और आर्थिक मदद पहुंचाती है, तो उसका विरोध क्यों किया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज संसाधनों को विकसित करने के लिए कई समझौते किए जा सकते हैं. गवर्नर ने तेल और गैस के भंडार निकालने पर भी जोर दिया. इस बयान के बाद एक अहम सवाल सामने आता है. अगर विदेशी कंपनियां खनिज निकालने के लिए निवेश करती हैं, तो कमाई का बंटवारा कैसे होगा? स्थानीय लोगों को कितना रोजगार मिलेगा? और पाकिस्तान को इससे कितना आर्थिक फायदा होगा?

पाकिस्तान के खनिज पर विदेशी कंपनियों की नजर?

पाकिस्तान के खनिज संसाधन लंबे समय से आर्थिक अवसर के तौर पर देखे जाते रहे हैं. अगर इनका सही तरीके से इस्तेमाल हो, तो इससे रोजगार बढ़ सकता है और सरकार को कमाई हो सकती है. लेकिन इसके लिए बड़ी रकम, तकनीक और लंबे समय तक काम करने की योजना की जरूरत होती है. यही वजह है कि खनिज संपदा वाले देशों में विदेशी कंपनियां भी निवेश करने में दिलचस्पी दिखाती हैं. खैबर पख्तूनख्वा में भी अब विदेशी निवेश की बात हो रही है. अमेरिकी मिशन ने खनन क्षेत्र को मजबूत करने में मदद की बात कही है. वहीं, गवर्नर ने विदेशी कंपनियों को साझेदारी के लिए बुलाया है. इन घटनाओं के बीच सेना प्रमुख असीम मुनीर और ट्रंप की पिछले साल व्हाइट हाउस में मुलाकात भी चर्चा में है.