दिल्ली

जज साहब, 1000 का सिलेंडर 5000 में म‍िल रहा है… LPG क‍िल्‍लत को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा शख्‍स, जस्‍ट‍िस के जवाब ने ह‍िला डाला

:दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे एक शख्‍स ने जज से गुहार लगाई क‍ि 1000 रुपये वाला एलपीजी का स‍िलेंडर 5000 रुपये का म‍िल रहा है. याच‍िकाकर्ता का कहना था क‍ि एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी और भारी कमी के आरोपों वाली जनहित याचिका (पीआईएल) दाख‍िल की थी ज‍िस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर द‍िया. हाईकोर्ट की बेंच ने कहा क‍ि चूंकि यह मामला कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए वह एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति का आदेश नहीं दे सकती.

नई द‍िल्‍ली.
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राजधानी में एलपीजी सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी और भारी कमी को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया.मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति का मुद्दा कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए अदालत इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं कर सकती.

मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा क‍ि मान लीजिए हम आदेश दे दें कि अब से कालाबाजारी और जमाखोरी नहीं होगी. क्या यह संभव है? यह बहुत बुनियादी बात है कि कोई भी ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता जो लागू करने योग्य न हो. उन्होंने टिप्पणी की कि इस मामले में आदेश जारी करना उतना ही अव्यावहारिक होगा, जितना सरकार को भारत से गरीबी खत्म करने का निर्देश देना. ऐसे मामलों में सरकार या तेल कंपनियों की ज़िम्मेदारी संसाधनों पर निर्भर करती है. आप हमसे दो महीने में गरीबी उन्मूलन जैसा परमादेश जारी करने को कह रहे हैं. क्या ऐसा परमादेश जारी किया जा सकता है?
‘जज साहब, 1000 रुपये का स‍िलेंडर 5000 रुपये में म‍िल रहा’
याचिकाकर्ता अधिवक्ता राकेश कुमार मित्तल ने दलील दी कि एलपीजी सिलेंडर काला बाजार में 5000 रुपये से अधिक में बेचे जा रहे हैं जबकि सिलेंडर की वास्तविक कीमत 1000 रुपये है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सप्ताह पहले उच्च न्यायालय की कैंटीन में भी गैस की कमी हो गई थी और यह आरोप लगाया कि देश में गैस की कमी के बावजूद सरकार इसके निर्यात की अनुमति दे रही है.
यदि सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है तो हम निर्देश दे सकते हैं: हाईकोर्ट
बेंच ने जवाब में कहा कि हाईकोर्ट कैंटीन में गैस की आपूर्ति उसी दिन बहाल कर दी गई थी. न्यायमूर्ति कारिया ने कहा कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है और जब सरकार पहले से ही कार्रवाई कर रही हो तो अदालत परमादेश जारी नहीं कर सकती. न्यायमूर्ति कारिया ने कहा क‍ि सरकार स्थिति से निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है. जब सरकार पहले से ही कार्रवाई कर रही है तो हम परमादेश जारी नहीं कर सकते… यदि सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है तो हम निर्देश दे सकते हैं. सरकार हर संभव कार्रवाई कर रही है. केंद्र सरकार द्वारा गैस के निर्यात की अनुमति देने संबंधी तर्क पर पीठ ने कहा कि वह सरकार की आर्थिक नीतियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.