:दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे एक शख्स ने जज से गुहार लगाई कि 1000 रुपये वाला एलपीजी का सिलेंडर 5000 रुपये का मिल रहा है. याचिकाकर्ता का कहना था कि एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी और भारी कमी के आरोपों वाली जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की थी जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया. हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि चूंकि यह मामला कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए वह एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति का आदेश नहीं दे सकती.
याचिकाकर्ता अधिवक्ता राकेश कुमार मित्तल ने दलील दी कि एलपीजी सिलेंडर काला बाजार में 5000 रुपये से अधिक में बेचे जा रहे हैं जबकि सिलेंडर की वास्तविक कीमत 1000 रुपये है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सप्ताह पहले उच्च न्यायालय की कैंटीन में भी गैस की कमी हो गई थी और यह आरोप लगाया कि देश में गैस की कमी के बावजूद सरकार इसके निर्यात की अनुमति दे रही है.
बेंच ने जवाब में कहा कि हाईकोर्ट कैंटीन में गैस की आपूर्ति उसी दिन बहाल कर दी गई थी. न्यायमूर्ति कारिया ने कहा कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है और जब सरकार पहले से ही कार्रवाई कर रही हो तो अदालत परमादेश जारी नहीं कर सकती. न्यायमूर्ति कारिया ने कहा कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है. जब सरकार पहले से ही कार्रवाई कर रही है तो हम परमादेश जारी नहीं कर सकते… यदि सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है तो हम निर्देश दे सकते हैं. सरकार हर संभव कार्रवाई कर रही है. केंद्र सरकार द्वारा गैस के निर्यात की अनुमति देने संबंधी तर्क पर पीठ ने कहा कि वह सरकार की आर्थिक नीतियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.




