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‘ईडी ऐसा नहीं कर सकती…’ I-PAC केस में अभिषेक मनु सिंघवी ने दी ऐसी दलील, सुप्रीम कोर्ट के जज ने पूछ लिया सवाल

I-PAC Supreme Court Hearing: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित I-PAC मामले में पूर्व डीजीपी राजीव कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनुसिंघवी ने अदालत में जोरदार दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि ईडी के पास जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है और न ही उसके अधिकारियों को ऐसा कोई विशेष अधिकार प्राप्त है.

पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य राज्य अधिकारियों पर जांच में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाया है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के सामने सबसे पहले एक नए आवेदक की याचिका पर विचार हुआ, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में मुख्य बहस शुरू हुई.

ईडी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोलकाता स्थित I-PAC दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के यहां जांच और तलाशी अभियान के दौरान राज्य प्रशासन ने बाधा डाली. इसी को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कानूनी टकराव सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है.
पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की मांग कर चुकी है. राज्य सरकार का कहना है कि यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों और संविधान के अनुच्छेद 32 की व्याख्या से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे पांच जजों की बेंच सुने.
अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें और कोर्ट का सवाल
पूर्व डीजीपी राजीव कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में जोरदार दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि ईडी के पास जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है और न ही उसके अधिकारियों को ऐसा कोई विशेष अधिकार प्राप्त है.
सिंघवी ने कहा, ‘आप जो सीधे नहीं कर सकते, उसे परोक्ष रूप से भी नहीं कर सकते.’ उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ईडी अधिकारी केवल अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उन्हें अलग से मौलिक अधिकार का दावा करने का अधिकार नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि ‘पैरेंस पैट्रिया’ (राज्य का संरक्षक के रूप में कार्य करना) का सिद्धांत आपराधिक जांच में लागू नहीं होता. साथ ही उन्होंने ईडी द्वारा अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का हवाला देने पर भी सवाल उठाए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि ‘डायरेक्ट-इनडायरेक्ट का सिद्धांत प्रशासनिक कानून में लागू होता है या मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की याचिकाओं में भी?’ इस पर सिंघवी ने कहा कि यह दोनों ही मामलों में लागू होता है.

ममता बनर्जी की ओर से नई दलील

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी अपनी दलीलें पेश की. उन्होंने संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए अनुच्छेद 32 की व्याख्या पर जोर दिया.
इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने आपत्ति जताई कि पहले ही कपिल सिब्बल ममता बनर्जी का पक्ष रख चुके हैं. इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत एक पक्ष के लिए दो वकील पेश हो सकते हैं.
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या इस केस को संविधान पीठ के पास भेजा जाएगा या मौजूदा बेंच ही फैसला सुनाएगी. यह मामला न केवल ईडी की शक्तियों बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों की सीमाओं को भी परिभाषित कर सकता है.