‘जो सुरक्षा राष्ट्रपति और CJI को भी नहीं मिलती, वो एक चुनाव आयुक्त को क्यों दी गई?’ खरगे ने उठाए सवाल

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चुनाव आयोग की निष्पक्षता और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग की स्वायत्तता खत्म की जा रही है और 2023 के कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को अभूतपूर्व कानूनी ढाल दी गई है.

बेंगलुरु
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 11 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला. खरगे ने सीधा आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ‘वोट चोरी’ की सहूलियत के लिए चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लगातार कमजोर कर रही है. इसके साथ ही उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति से न्यायपालिका को अवगत कराने के लिए वे और राहुल गांधी 12 अक्टबर को भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात करेंगे. बेंगलुरु में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं ने सीजेआई को औपचारिक पत्र लिखकर सोमवार शाम 4:00 से 5:00 बजे के बीच का समय मांगा है.
खरगे ने कहा, “12 अक्टूबर को हम सीजेआई से मिलने जा रहे हैं. मैंने भी चिट्ठी लिखी है और राहुल जी ने भी पत्र भेजा है. हमने 4 से 5 बजे के बीच का वक्त तय किया है. हम उनके सामने मौजूदा हालात रखेंगे. हम उनसे कोई मांग नहीं कर सकते, केवल हाथ जोड़कर अपनी विनती पेश करेंगे.” मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए खरगे ने गंभीर आरोप लगाया कि आयोग के भीतर साथी चुनाव आयुक्तों की आवाज को दबाया जा रहा है, जिससे संवैधानिक संस्था स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसले लेने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रही है.
खरगे ने आरोप लगाया, “CEC एक संवैधानिक संस्था है. वे स्वतंत्र हैं। वे स्वतंत्र फ़ैसले ले सकते हैं. लेकिन वह उन्हें स्वतंत्र फैसले नहीं लेने दे रहे हैं. CEC के दो सदस्यों ने खुलकर कमीशन की पोल खोल दी है – कि कमीशन कैसे काम कर रहा है, कैसे गड़बड़ियां हो रही हैं, और सदस्यों को कैसा महसूस हुआ, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई,” उन्होंने आगे दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए संस्था के साथ समझौता किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, “ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि वह चाहते हैं कि ‘वोट चोरी’ जारी रहे. उन्होंने जितनी भी ‘वोट चोरी’ की है, उसी के दम पर उन्होंने केंद्र और राज्यों में सरकार बनाई है.” मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा की शर्तों के बारे में 2023 में बने कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, खरगे ने दावा किया कि अधिकारियों को बचाने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय किए गए. खरगे ने सवाल किया, “ऐसा माहौल बनाने के लिए, मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त और सदस्यों की सुरक्षा के लिए 2023 का एक्ट लाए. उन्होंने वह सुरक्षा (इम्युनिटी) दी. ऐसी सुरक्षा तो भारत के राष्ट्रपति या सीजेआई को भी नहीं मिलती, लेकिन एक चुनाव आयुक्त को दी गई है. क्यों?”
कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, “वह देने के बाद, उन्होंने यह प्रक्रिया शुरू की – वोट चोरी, EVM, और वह सब; और वह (CEC) जो भी गलतियां करते हैं, उनसे उन्हें मरने तक छूट मिली हुई है. इसका मतलब है कि यह वोट हथियाने और लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी करने की साज़िश है, और वह यह सब कर रहे हैं, और हम इसके खिलाफ लड़ेंगे.”
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतांत्रिक नियमों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए, खरगे ने कहा कि देश अभी ‘अघोषित आपातकाल’ का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा, “देश में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री द्वारा अराजकता फैलाई जा रही है. एक अघोषित आपातकाल लगाया जा रहा है. इसलिए, हम इसके खिलाफ लड़ते हैं.”
विपक्ष और CJP के विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में की गई भारी सुरक्षा व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए, खरगे ने कहा, “10 अक्टूबर लगभग 32,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. इससे पता चलता है कि उन्हें कितना डर ​​है.” ये बयान तब आए हैं जब 10 अक्टूबर को दिल्ली में भारी सुरक्षा, बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने और राजनीतिक टकराव का माहौल रहा. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था.
पुलिस ने CJP के अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को एक विमान से हिरासत में लिया, गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड लगाए गए और 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखे गए. इन कदमों से लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के आरोप लगे और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी पलटवार किया. राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और TMC प्रमुख ममता बनर्जी जैसे प्रमुख विपक्षी नेता शामिल थे.
(इनपुट एएनआई से भी)