शिक्षा सुधार ही नहीं, सैनिकों और किसानों के लिए भी किया बड़ा काम…जानिए सोनम वांगचुक का सफर

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लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और अन्वेषक सोनम वांगचुक, जिन्होंने कभी शून्य से नीचे के तापमान में अपने क्षेत्र के अधिकारों के लिए जंग लड़ी थी, अब दिल्ली की भीषण गर्मी और उमस में देश की शिक्षा प्रणाली को बचाने के लिए डटे हुए हैं।

नेशनल डेस्क

 लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और अन्वेषक सोनम वांगचुक, जिन्होंने कभी शून्य से नीचे के तापमान में अपने क्षेत्र के अधिकारों के लिए जंग लड़ी थी, अब दिल्ली की भीषण गर्मी और उमस में देश की शिक्षा प्रणाली को बचाने के लिए डटे हुए हैं। NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनशन पर हैं। हालांकि भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस शनिवार को अस्पताल उठाकर ले गई है। उनके मेडिकल चेकअप के बाद डॉक्टरों ने उन्हें दवाइयां लेने और तरल पदार्थ नसों के जरिए लेने की सलाह दी, लेकिन सोनम वांगचुक ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा है कि वह न ही दवाइयां लेंगे और न ही नसों के जरिए तरल पदार्थ।

जेल की सलाखों से जन-आंदोलन तक
वांगचुक का यह संघर्ष बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। साल 2024 में उन्होंने लद्दाख के संसाधनों की रक्षा और इसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 11,500 फीट की ऊंचाई पर 21 दिनों तक उपवास किया था। इसके बाद, 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगे और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत 170 दिनों तक जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया। मार्च 2026 में रिहाई के कुछ ही महीनों बाद, वे एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधारों की अलख जगाने दिल्ली पहुंच गए हैं।

नवाचार से सक्रियता की ओर
एक कुशल इंजीनियर और नवाचारी के रूप में वांगचुक ने ‘आइस स्टूपा’ जैसी तकनीक विकसित की, जिससे लद्दाख के किसानों को पानी की किल्लत से निजात मिली। उनकी जीवनशैली और दर्शन ने ही बॉलीवुड फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान द्वारा निभाए गए पात्र फुन्सुक वांगडू को प्रेरित किया था। वांगचुक को उनके सामाजिक कार्यों और नवाचारों के लिए प्रतिष्ठित रमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

भारतीय जवानों के लिए कवच
सोनम वांगचुक ने भारतीय जवानों के लिए हीटिंग टेंट ( SOLAR HEATED MILITARY TENT ) बनाया। इन हीटिंग टेंट का लाभ देश के उन जवानों को मिलेगा जो लद्दाख सियाचिन सीमा पर हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बीच हर पल तैनात रहते हैं।

लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई
वांगचुक की सक्रियता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। वे लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। 2024 में उन्होंने लद्दाख से दिल्ली तक 1,000 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा भी की थी, ताकि सरकार का ध्यान इन मांगों की ओर आकर्षित किया जा सके।