HDFC Update : हंगामा है क्‍यों बरपा? आखिर एचडीएफसी बैंक ने ऐसा क्‍या कर दिया जो राशन-पानी लेकर चढ़ गए इंटरनेट यूजर

दिल्ली

HDFC Bank Chairman : देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी ने जैसे ही राजीव कुमार को अपना चेयरमैन नियुक्‍त करने का ऐलान किया, सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया. राजीव कुमार साल 2024 में मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त रहे हैं और पूर्व वित्‍त सचिव की भी जिम्‍मेदारी निभाई थी. उनके कार्यकाल में पिछला लोकसभा चुनाव भी हुआ था.

 

नई दिल्‍ली. यह कहावत तो आपने भी सुनी होगी कि जब समय खराब होता है तो ऊंट पर बैठे व्‍यक्ति को भी कुत्‍ता काट लेता है. कहने का मतलब है कि खराब समय में अपनी समझ से लिए गए सही निर्णय भी उल्‍टे पड़ते दिखाई देते हैं. ताजा मसला किसी व्‍यक्ति का नहीं, बल्कि कंपनी का है. वह भी देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी का. एचडीएफसी ने जबसे अपने दो धंधों को मिलाकर एक बड़ी कंपनी बनाई है, उसके बाद से ज्‍यादातर समय विवादों में ही बीता है. ताजा मामला बैंक की ओर से राजीव कुमार को अपना पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्‍त करने का है. लेकिन, इस फैसले में लोगों को जाने ऐसा क्‍या दिखा जो इंटरनेट पर बैंक के फैसले पर हंगामा शुरू हो गया.
एचडीएफसी बैंक के पूर्व अंशकालिक चेयरमैन ने पिछले दिनों निजी कारणों से अपना पद छोड़ दिया था. इसके बाद से ही बैंक अपने नए बॉस की तलाश में जुटा था, जो पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त और वित्‍त सचिव भी रहे हैं. साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी राजीव कुमार की देखरेख में ही हुआ था. एचडीएफसी बैंक ने 29 जून को ऐलान किया कि राजीव कुमार को 4 साल के लिए बैंक का पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्‍त करने का प्‍लान है. हालांकि, इसके लिए रिजर्व बैंक की मंजूरी अभी बाकी है. लेकिन, उससे पहले ही सोशल मीडिया पर बैंक के इस फैसले को लेकर आलोचना का सैलाब उमड़ पड़ा.
अनुभवी राजीव कुमार पर विवाद क्‍यों
साल 1984 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार चुनाव आयुक्‍त होने के साथ ही वित्‍त सचिव भी रहे हैं. उन्‍हें फाइनेंस की काफी जानकारी है और वे करीब 40 साल तक जनता से जुड़ी नीतियों और फाइनेंशियल सेक्‍टर में सुधार को लेकर काम करते रहे हैं. एचडीएफसी बैंक ने बताया कि उसके बोर्ड ने भी राजीव कुमार को 4 साल के लिए निदेशक नियुक्‍त करने की अनुमति दे दी है, जिसमें से तीन साल तो पार्ट टाइम चेयरमैन भी रहेंगे. बैंक ने उनके अनुभवों को देखते हुए यह फैसला किया है. लेकिन, उनके चुनाव आयुक्‍त रहने के दौरान किए गए फैसलों की वजह से सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा है.
इंटरनेट पर मच गया हंगामा
राजीव कुमार का नाम एचडीएफसी की ओर से सार्वजनिक किए जाते ही इंटरनेट पर तूफान आ गया. सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर तमाम यूजर्स ने इस फैसले की आलोचना की. मनीष नाम के एक यूजर ने लिखा कि राजीव कुमार एचडीएफसी बैंक की कमान भी वैसे ही संभालेंगे, जैसे उन्‍होंने चुनाव आयुक्‍त का पद संभाला था. राजीव कुमार के आने से बैंक की उम्‍मीदें खत्‍म और उन लोगों को अपने पैसों की चिंता शुरू कर देनी चाहिए जिन्‍होंने यहां खाता खोला है. यह सभी के लिए एक चेतावनी है, क्‍योंकि बैंक इससे अच्‍छा फैसला कर सकता था.
रिटायर्ड आईपीएस ने भी साधा निशाना
रिटायर्ड आईपीएस एम नागेश्‍वर राव ने अपने एक्‍स हैंडल पर लिखा, तमाम बेहतरीन बैंक मौजूद हैं जो एचडीएफसी बैंक को पेशेवर तरीके से चला सकते हैं और उसकी मुसीबतें खत्‍म कर सकते हैं. लेकिन, बैंक ने एक पूर्व सिविल सर्वेंट को अपना मुखिया चुन लिया, जिसके पास बैंकिंग का कोई बैकग्राउंड नहीं है. यह नियुक्ति पूरी तरह 2 राजनीतिक कारणों से दिख रही है. पहली, बतौर चुनाव आयुक्‍त उनके रोल के लिए और दूसरा कि देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक पर सरकार के अप्रत्‍यक्ष कंट्रोल के बनाए रखने के लिए.
विवाद के बाद भी नियुक्ति क्‍यों
विजपुनीत नाम के एक यूजर ने लिखा कि राजीव कुमार एचडीएफसी बैंक ने अपना मुखिया बना लिया और तमाम नामी और अनुभवी बैंकर्स को नजरअंदाज कर दिया. यह नियुक्ति तब की गई है, जबकि बतौर मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त उनका कार्यकाल काफी विवादित रहा था. आज अचानक देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक का मुखिया बनाए जाने पर सवाल तो उठेगा ही. कपिल नाम के वेरिफाइड यूजर ने लिखा कि राजीव कुमार को 1.5 लाख रुपये की पेंशन मिलेगी और एचडीएफसी बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन के लिए 3 लाख रुपये की सैलरी भी मिलेगी. इस तरह, राजीव कुमार को हर महीने 4.5 लाख रुपये मिलेंगे.