सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात नगर निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव हलफनामे में न केवल अपनी संपत्ति, बल्कि अपने जीवनसाथी की संपत्ति का भी खुलासा करना होगा। शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट की ओर से गलत कानूनी प्रावधान लागू करने की गलती एक ऐसी खामी है जिसे सुधारा जा सकता है और इससे आपराधिक कार्यवाही अपने-आप अमान्य नहीं हो जाती।
नई दिल्ली
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने गुजरात की पूर्व नगर पार्षद चंद्रिकाबेन किशोर डफडा की अपील को आंशिक रूप से मंजूरी देते हुए ये निर्देश जारी किए। डफडा ने 2015 के गुजरात नगर निकाय चुनावों के लिए अपने नामांकन हलफनामे में पति की कुछ अचल संपत्तियों की जानकारी न देने के आरोप में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी थी।
