बीजिंग में हुई राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ने ईरान को बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है. दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों ने एक सुर में ऐलान किया है कि ऊर्जा की बेरोकटोक सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता हर हाल में खुला रहना चाहिए. चीन ने न केवल इस रास्ते के सैन्यीकरण का विरोध किया है, बल्कि ईरान द्वारा जहाजों से ‘टोल टैक्स’ वसूलने के प्लान को भी सिरे से खारिज कर दिया है. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिनपिंग ने अब ईरान पर अपनी निर्भरता कम करने का भी प्लान बना लिया है.
बीजिंग
जंग के बीच ईरान ने होर्मुज को अखाड़ा बना दिया है. अब ये देश दुनिया की तेल सप्लाई के इस रास्ते पर कब्जा कर चुका है और टोल टैक्स वसूलने का फरमान जारी कर दिया है. इस बीच ईरान को अपने सबसे पक्के दोस्त चीन से तगड़ा झटका मिला है. आज जब ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई तो होर्मुज को लेकर एक बड़ा फैसला हो गया है. अमेरिका और चीन अब होर्मुज के मुद्दे पर एक ही जैसी जुबान बोल रहे हैं. दोनों ने एक सुर में कुछ ऐसी बात कही है जो ईरान के टोल-टैक्स वाले प्लान पर अटैक से कम नहीं है.
ट्रंप और शी ने होर्मुज पर ले लिया बड़ा फैसला
व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद एक बड़ा बयान जारी किया है. खबर है कि दोनों देश कई आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर एक पेज पर आ गए हैं. वैसे तो बातचीत व्यापार, निवेश और ड्रग्स तस्करी रोकने पर हुई लेकिन जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वो थी ‘एनर्जी सप्लाई’ और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर बनी सहमति. दोनों महाशक्तियां इस बात पर राजी हो गई हैं कि दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की सप्लाई को चालू रखने के लिए होर्मुज का रास्ता हर हाल में खुला रहना चाहिए.
अब तक चीन को ईरान का साथ देने वाला माना जाता था लेकिन इस बार शी जिनपिंग ने साफ कर दिया है कि वो इस रास्ते के ‘सैन्यीकरण’ के खिलाफ हैं. चीन का कहना है कि इस रास्ते के इस्तेमाल पर कोई ‘टोल’ या टैक्स भी नहीं वसूला जाना चाहिए. यानी चीन ने सीधे तौर पर ईरान के दबदबे को चुनौती दे दी है.
चीन ने ईरान को दिया धोखा
शी जिनपिंग ने इस बैठक में एक और बड़ा दांव खेला है. उन्होंने कहा है कि भविष्य में होर्मुज के रास्ते पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा. ये बात ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि चीन ईरान के कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है. अगर चीन अमेरिका से तेल लेने लगता है तो ईरान का खजाना खाली हो जाएगा और उसकी आर्थिक हालत और खराब हो जाएगी.
ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग में क्या हुई डील?
मीटिंग में सिर्फ तेल की ही बात नहीं हुई. ट्रंप ने अमेरिका में फैल रहे नशे यानी फेंटेनाइल के कच्चे माल को चीन से आने से रोकने पर जोर दिया. इसके बदले में चीन को अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच देने और चीनी निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई. अमेरिकी कंपनियों के बड़े बॉस भी इस बैठक का हिस्सा थे, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते नए मोड़ पर जा सकते हैं.
