वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत की इकोनॉमी पर बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल, सोना और खाद के उपयोग में कटौती की अपील के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. शरद पवार ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है.
नई दिल्ली
वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालातों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से कुछ कड़े कदम उठाने और संसाधनों के उपयोग में कटौती करने की अपील की है. पीएम की इस अचानक आई ‘किफायत’ (Austerity) वाली सलाह ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के अध्यक्ष शरद पवार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि पीएम की घोषणाओं से देश के आम नागरिकों, उद्योग जगत और विदेशी निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है. पवार ने मांग की है कि प्रधानमंत्री को तुरंत सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलानी चाहिए. इसमें देश की आर्थिक स्थिरता और भविष्य की नीतियों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए.
पीएम मोदी ने जनता से क्या अपील की है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद की रैली और सोशल मीडिया के जरिए देश के सामने 7 बड़ी अपीलें रखी हैं. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से सप्लाई चैन पूरी तरह टूट गई है. पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं. विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पीएम ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह दी है. इसके अलावा उन्होंने ऑफिस जाने के बजाय ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करने और खाने के तेल की खपत कम करने को कहा है. उन्होंने किसानों से भी केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल आधा करने का आग्रह किया है. पीएम का तर्क है कि डॉलर में होने वाले इन आयातों को कम करके ही देश की आर्थिक सेहत को सुधारा जा सकता है.
शरद पवार ने क्यों जताई आर्थिक अस्थिरता की आशंका?
दिग्गज नेता शरद पवार का कहना है कि जिस तरह से अचानक ये घोषणाएं की गई हैं, उनका भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ेगा. पवार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों को विश्वास में लेना जरूरी है.
पवार ने सरकार को सुझाव दिया कि केवल राजनीतिक नेताओं ही नहीं, बल्कि देश के बड़े अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ भी एक हाई-लेवल मीटिंग होनी चाहिए.
पवार के मुताबिक, जनता के बीच इस समय असुरक्षा की भावना है जिसे दूर करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. उनका मानना है कि अचानक आई इस एडवाइजरी ने मार्केट में एक नकारात्मक संदेश भेजा है.
विपक्ष ने सरकार को क्यों घेरा और क्या हैं आरोप?
महाराष्ट्र कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी की इन अपीलों को उनकी सरकार की नाकामी बताया है. कांग्रेस का आरोप है कि पीएम ने देश को आर्थिक संकट में धकेल दिया है. विपक्ष ने सवाल उठाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री लोगों से पेट्रोल बचाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वह खुद दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ रोड शो कर रहे हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने इसे ‘लापरवाह रवैया’ करार दिया है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने जनता को फायदा नहीं दिया. अब संकट आने पर सारा बोझ आम आदमी पर डाला जा रहा है.
विपक्ष के हमलों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री का बचाव किया है. फडणवीस ने कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा के भीषण संकट से गुजर रही है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई को रोक दिया है. उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पेट्रोल 450 रुपये लीटर तक पहुंच गया है. फडणवीस के मुताबिक, भारत में सप्लाई बनी रहे, इसके लिए संसाधनों का सही इस्तेमाल जरूरी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है.
