Donald Trump Offer to China: ईरान युद्ध में सब कुछ वैसा बिल्कुल नहीं हो रहा है, जैसा अमेरिका ने सोचा था. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप अब एक ऐसी चाल के साथ सामने आए हैं कि उन्हें ईरान के सबसे अच्छे दोस्त का साथ मिल जाए और वो बिल्कुल अकेला पड़ जाएगा. मुद्दा ये है कि चीन, ट्रंप के इस ऑफर को मानेगा या नहीं.
ईरान-अमेरिका के युद्ध में सबसे ज्यादा चर्चा में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, जिसे लेकर ईरान पहले से ही अमेरिका को चेता रहा था. जैसे-जैसे इसे लेकर संघर्ष बढ़ रहा है, अमेरिका का सब्र टूटता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे को लेकर न सिर्फ ईरान पर 20 गुना ज्यादा ताकत से हमले की चेतावनी दी है बल्कि वो चीन को भी इस जंग में खींचना चाह रहा है. तनाव की वजह से ये पूरा इलाका जाम हो चुका है, यहां बहुत से देशों के शिप फंसे हुए हैं, जिनमें भारत भी है. आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कोई भी देश बोलने को तैयार नहीं है, वहीं ईरान का दावा है कि हॉर्मुज उसके कंट्रोल में है.
डोनाल्ड ट्रंप ने इसी बीच ट्रुथ सोशल पर जो कुछ भी लिखा है, उससे साफ पता चल रहा है कि युद्ध उनके कैलकुलेशन के हिसाब से तो नहीं चल रहा है. उन्होंने इसे लेकर चीन को एक ऑफर देते हुए लिखा है – ‘अगर ईरान ऐसा कुछ भी करता है, जिससे हॉर्मुज में तेल की आवाजाही रुके तो अमेरिका उस पर अब तक हुए हमलों से भी 20 गुना ज्यादा तेजी से हमले करेगा. अमेरिका उन ठिकानों को भी खत्म कर देगा, जिन्हें तबाह करना आसान है और ईरान को एक देश के रूप में दोबारा खड़ा होना नामुमकिन हो जाएगा. उन पर मौत, आग और कहर बरसेगा. मैं उम्मीद करता हूं कि ऐसा न हो. यह अमेरिका की ओर से चीन और उन सभी देशों के लिए एक उपहार है, जो हॉर्मुज का खूब इस्तेमाल करते हैं. उम्मीद है कि इस कदम की सराहना की जाएगी.’
हॉर्मुज से चीन को कितना फायदा?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री रास्ता है. यहां से हर दिन लगभग 20% वैश्विक तेल और बड़ी मात्रा में LNG गुजरती है. इस रास्ते से ज्यादातर खाड़ी देशों सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, कतर और ईरान तेल निर्यात करते हैं. चीन हॉर्मुज से आने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार देश है. यहां से आने वाले ऑयल फ्लो का कुल 37.7 फीसदी हिस्सा चीन को जाता है और लगभग 5.4 मिलियन बैरल तेल रोजाना यहां से चीन आयात करता है. इस रास्ते से भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन समेत एशियाई देशों को 85-90 फीसदी तक तेल जाता है, जिसमे से सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी हिस्सा चीन को जाता है. ऐसे में इस रास्ते से चीन को भरपूर फायदा होता है, यही वजह है कि अमेरिका उसे हॉर्मुज को लेकर ऑफर दे रहा है.
