अदालत में प्रबंधन सुधारने और जल्दी न्याय देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पेश होने वाले वकीलों के लिए एसओपी जारी की है। इसके तहत सभी वकीलों को तय समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा।
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने अपने सामने पेश होने वाले वकीलों के लिए दलीलें रखने और लिखित नोट जमा करने की समय-सीमा तय की। शीर्ष कोर्ट ने इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इस कदम का मकसद कोर्ट के कामकाज को बेहतर बनाना और न्याय की प्रक्रिया को तेज करना है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों ने सोमवार को एक नोटिस जारी किया, जिसमें सभी मामलों में मौखिक दलीलों को तय समय में पूरा करने के लिए एसओपी तय की गई है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि वरिष्ठ वकीलों समेत जो वकील बहस करने वाले होंगे, उन्हें रिकॉर्ड पर अपने वकील के जरिये अधिकतम पांच पन्नों की लिखित दलील जमा करनी होगी। साथ इसकी एक प्रति सुनवाई की तारीख से कम से कम तीन दिन पहले दूसरे पक्ष को देना अनिवार्य होगा।
