IMD Alert: सावधान, अगला महीना मुसीबत लेकर आएगा, IMD की आ गई नई भव‍िष्‍यवाणी

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मौसम विभाग का अनुमान है क‍ि अक्‍तूबर में फ‍िर पूरे देश में भारी बारिश हो सकती है. द‍िल्‍ली एनसीआर में मंगलवार को हुई बार‍िश से गर्मी से राहत मिली. लेकिन अगर मौसम विभाग की भव‍िष्‍यवाणी सच होती है तो मुसीबत आनी तय है.

 

द‍िल्‍ली-एनसीआर में मंगलवार को जोरदार बार‍िश हुई. कई जगह जलभराव की वजह से जाम लग गया और लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ी. लेकिन अगला मह‍ीना और मुसीबत भरा होने वाला है. क्‍योंक‍ि मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है क‍ि अक्‍तूबर में पूरे भारत में भारी बार‍िश हो सकती है. आईएमडी के डायरेक्‍टर जनरल मृत्‍युंजय महापात्रा ने बताया क‍ि अक्‍तूबर में सामान्‍या से 115 फीसदी तक ज्‍यादा बार‍िश होने की संभावना है. ये भी हो सकता है क‍ि 50 साल का रिकॉर्ड टूट जाए. आमतौर पर अक्‍तूबर महीने में इतनी बार‍िश दर्ज नहीं की जाती.

मृत्‍युंजय महापात्रा ने बताया क‍ि सितंबर में भी सामान्‍य से ज्‍यादा बार‍िश दर्ज की गई है. अब अक्टूबर में देश को पिछले 50 वर्षों के औसत से 115% से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है. भारत में मानसून आमतौर पर सितंबर में कमजोर पड़ने लगता है, लेकिन इस बार मॉनसून की सक्रियता लंबी रही और कुछ क्षेत्र अभी भी नमी से भरे हुए हैं. इस नमी के कारण अक्टूबर में भी भारी बारिश संभव है. उत्तर भारत में सर्दियों के पहले मौसम में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हो जाते हैं. ये पश्चिम से आने वाली कम दबाव वाली हवाओं की प्रणाली हैं. जब ये हवाएं नमी वाली हवा से टकराती हैं, तो बारिश होती है. 

क्‍या हो सकती है वजह
आमतौर पर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली आर्द्र हवाएं उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ती हैं. जब ये हवाएं उत्तर भारत की ठंडी हवाओं और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से टकराती हैं, तो भारी बारिश होती है. दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में भीषण गर्मी रही. गर्म हवा अधिक नमी को पकड़ सकती है. जब यह नमी ठंडी या निचली दबाव वाली हवा से मिलती है, तो बारिश की संभावना बढ़ जाती है. एक और वजह हो सकती है क‍ि वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण मॉनसून और अन्य मौसमी प्रणाली असामान्य रूप से सक्रिय हो रही हैं. यही वजह है कि बारिश का पैटर्न अब अधिक अनिश्चित और कभी-कभी अत्यधिक होने लगा है.
फसलों को भारी नुकसान
अक्‍तूबर में फसल कटने का वक्‍त होता है, अगर ऐसे वक्‍त में भारी बार‍िश हुई तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. धान, मक्का, सोयाबीन और गन्ना जैसी फसलें अधिक प्रभावित होंगी. फसलें जलजमाव में डूब सकती हैं, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं और पैदावार कम हो सकती है. दलहनी और सब्जियों में भी रोग और कीट बढ़ने का खतरा रहेगा. कटाई के समय बारिश होने से फसल खराब हो सकती है और लागत बढ़ सकती है. सिंचाई और फसल सुरक्षा उपायों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट संभव है.द‍िल्‍ली-एनसीआर जैसे शहरी क्षेत्रों में तेज बार‍िश से जलभराव होगा और लोगों को जाम जैसी समस्‍या से जूझना पड़ेगा.