‘मतदाताओं को पार्टियों के चुनावी वादों की व्यवहारिकता के बारे में जानने का अधिकार’,: मुख्य चुनाव आयोग राजीव कुमार

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राजीव कुमार ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को अपने चुनावी घोषणापत्र में वादे करने का अधिकार है और मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि ये वादे असली है या नहीं।

नई दिल्ली

मुख्य चुनाव आयोग राजीव कुमार ने शनिवार को बताया कि मतदाताओं को राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए गए वादों की व्यवहारिकता के बारे में जानने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुद्दा न्यायालय में विचाराधीन है।

राजीव कुमार ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को अपने चुनावी घोषणापत्र में वादे करने का अधिकार है और मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि ये वादे असली है या नहीं। प्रेस कॉन्फेरेंस में इसपर किए गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “प्रवर्तन निदेशालय को सतर्क रहने और नकदी और मुफ्त वस्तुओं के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन को भी ऑललाइन लेनदेन पर नजर रखने को कहा गया है।”

फेक न्यूज पर राजीव कुमार ने दिया ये जवाब
फेक न्यूज पर सवाल किए जाने पर राजीव कुमार ने कहा, “आज फेक न्यूज ऐसे चल रही जैसे कि आज आपने बताया कि चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। हालांकि, इस खबर को आधे घंटे के भीतर ही फेक न्यूज बता दिया गया है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि कई पार्टियों ने एक ही चरण में चुनाव कराने की मांग की है। पिछले दो दिनों में राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठक करने के बाद राजीव कुमार ने कहा कि अधिकांश पार्टियों ने उन्हें सूचित किया कि कई पार्टियों ने मतदाताओं को वितरण के लिए धन जमा करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमने कई राष्ट्रीय पार्टियों जैसे भाजपा, कांग्रेस और राज्य की पार्टियों जैसे डीएमके, एआईडीएमके से मुलाकात की। उनमें से अधिकांश ने एक चरण में चुनाव कराने की मांग की है।”

इसके अलावा पार्टियों ने शराब वितरण और ऑनलइन मोड के माध्यम से रुपये के ट्रांसफर पर रोक लगाने की भी मांग की है। इससे पहले चुनावों में पार्टियों ने एक दूसरे पर मतदाताओं को पैसे या वस्तुओं का वितरण कर उन्हें लुभाने का भी आरोप लगाया था।