किसी को सच तो कहना ही होगा। अगर हम सब डर गए तो देश में कोई लोकतंत्र नहीं रहेगा : सुप्रिया सुले

महाराष्ट्र

सत्ता और अमित शाह से हाथ मिलाने के बजाय पिता के साथ संघर्ष करना चुना’, सुप्रिया सुले का दावा

पुणे

सांसद सुले इस साल 2 जुलाई को एनसीपी में हुए विभाजन का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘उस व्यक्ति को मत भूलिए जिसने आपको जन्म दिया है। किसी को सच तो कहना ही होगा। अगर हम सब डर गए तो देश में कोई लोकतंत्र नहीं रहेगा। आज हमें तोड़ा गया और कल आपका भी यही हश्र होगा।’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गुरुवार को कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे, सत्ता और संघर्ष। उन्होंने बताया कि संघर्ष के पक्ष में मेरे पिता थे और सत्ता के पक्ष में (केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता) अमित शाह थे। मुझे सत्ता और संघर्ष के बीच चयन करना था, इसलिए मैने संघर्ष को चुना।

सांसद सुले इस साल 2 जुलाई को एनसीपी में हुए विभाजन का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘उस व्यक्ति को मत भूलिए जिसने आपको जन्म दिया है। किसी को सच तो कहना ही होगा। अगर हम सब डर गए तो देश में कोई लोकतंत्र नहीं रहेगा। आज हमें तोड़ा गया और कल आपका भी यही हश्र होगा।’

अगले 10 महीने बारामती में रहेंगी सुप्रिया
अजित पवार और आठ विधायक एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए, जबकि सुले और कई अन्य ने पार्टी संस्थापक शरद पवार के साथ रहना चुना। सुले ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार को सूचित कर दिया है कि वह अगले 10 महीने तक बारामती में रहेंगी और मुंबई नहीं आएंगी।

लोकसभा चुनाव 2024 की पहली छमाही में होंगे, जबकि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव बाद में होंगे। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने पति और बच्चों से कहा कि मैं अक्तूबर तक बारामती में रहूंगी। मैंने उनसे कहा कि मैं मुंबई नहीं आऊंगी और उनसे खुद को संभालने के लिए कहा।’ उन्होंने कहा, ‘आने वाले चुनाव देश के लिए सर्वोपरि होंगे और यही कारण है कि अगले पांच वर्षों के भाग्य का फैसला करने के लिए अगले कुछ महीने हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।’