चुनाव से पहले चांद-सितारों का वादा करते हैं और फिर बाद में कह देते हैं जुमला- शाह पर तंज कस बोले उद्धव ठाकरे

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कोरोना की स्थिति को लेकर भी उद्धव ने केंद्र पर निशाना साधते कहा कि आप लोग चिंता मत करिए। हम हालात को संभालने में समर्थ हैं। उनका कहना था कि आप केवल समर्थन कीजिए।

मुंबईः

महाविकास अघाड़ी गठबंधन बनने के बाद से बीजेपी शिवसेना के बीच की तल्खी किसी से छिपी नहीं है। दोनों एक दूसरे पर कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ताजा मामले में उद्धव ठाकरे ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा तंज कसा है। ठाकरे ने उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो चुनाव में केवल झूठ बोलता है।

अपने सूबे के अफसरों के साथ मीटिंग में उद्धव ने कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं जो चुनाव से पहले चांद-सितारों का वादा करते हैं और फिर बाद में कह देते हैं कि ये तो चुनावी जुमला था। उनका इशारा दरअसल 15-15 लाख के उस वायदे की तरफ था जो बीजेपी ने 2014 चुनाव से पहले लोगों से किया था। उस दौरान बीजेपी की तरफ से पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने चुनावी रैलियों में कहा था कि उन्हें पता है कि विदेश में कितना काला धन जमा है। ये धन भारत में उनकी सरकार बनने पर वापस लाएंगे और फिर हर नागरिक को 15-15 लाख मिल सकते हैं।

उद्धव ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे झूठे वायदे और दावों से बचती है। वो ऐसा करने में यकीन नहीं करते। उनका कहना था कि अमित शाह हर चुनाव से पहले लोगों को सब्जबाग दिखाते हैं और फिर बाद में चुनावी वायदा कहकर मुकर जाते हैं। कोरोना की स्थिति को लेकर भी उद्धव ने केंद्र पर निशाना साधते कहा कि आप लोग चिंता मत करिए। हम हालात को संभालने में समर्थ हैं। उनका कहना था कि आप केवल समर्थन कीजिए। एमवीए सरकार के पास जोश के साथ होश भी है और वो अपने लोगों को ऐसे खतरे से बचाने में पूरी तरह से समर्थ है।

बीजेपी और शिवसेना के बीच विचारधारा पर वर्चस्व को लेकर तनातनी है। दोनों खुद को हिंदुत्व और राष्ट्रवादी पार्टी बताते हैं। हालांकि, उद्धव बीजेपी के हिंदुत्व प्रेम पर सवाल उठाते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने विधानसभा में कहा था कि केंद्र सरकार ने हिंदुत्व के विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा था कि भाजपा को अपनी पूर्व सहयोगी शिवसेना को हिंदुत्व का पाठ नहीं पढ़ाना चाहिए। उधर, भाजपा ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कई बार कहा है कि पार्टी ने कांग्रेस और के साथ गठबंधन करने के बाद हिंदुत्व की विचारधारा को त्याग दिया है।