प्रेस की आजादी और विधायकों के विशेषाधिकार पर अदालत पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम

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सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों को लेकर हलचल रही। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने विधायकों के विशेषाधिकार और प्रेस की आजादी से जुड़े मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। 

नई दिल्ली

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम ने विधायकों के विधायी विशेषाधिकार की सीमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने और अदालत की सहायता करने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ 6 अक्टूबर से इस मामले पर सुनवाई शुरू करेगी। यह मामला 2003 में पत्रकार एन रवि और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। उस समय तमिलनाडु विधानसभा ने विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन के मामले में पत्रकारों को 15 दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में छह पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अंजुम ने अपनी याचिका में कहा है कि मामला केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस के बीच संवैधानिक संबंधों से जुड़ा है। उन्होंने पूछा है कि विधानसभा की कार्यवाही की आलोचना या उसकी निष्पक्ष रिपोर्टिंग कब विशेषाधिकार का उल्लंघन मानी जा सकती है। मामले में संविधान के अनुच्छेद 194(3), 19(1)(ए) और 21 की व्याख्या भी होगी। पहले अलग-अलग पीठों के फैसलों में इस मुद्दे पर अलग राय सामने आई थी। इसी कारण मामले को सात जजों की पीठ के पास भेजा गया है।