उत्तराखंड में मां नंदा देवी की पूजा होती है. उनका मायका नौटी गांव में है, जहां पर वे हर 12 साल में आती हैं. मायके से ससुराल जाने पर नंदा राजजात यात्रा निकाली जाती है. वहीं भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि को विशेष पूजा होती है.
यह यात्रा देवी नंदा के मायके (नौटी गांव, चमोली) से उनके ससुराल (कैलाश पर्वत) जाने की विदाई का प्रतीक है. इस यात्रा का नेतृत्व एक विशेष चार सींग वाले काले मेढ़े (चौसिंग्या खाडू) द्वारा किया जाता है, जो देवी का वाहन माना जाता है.
भाद्रपद में होती है विशेष पूजा
इसके साथ ही भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का भी विशेष महत्व है, जिसे नंदा अष्टमी भी कहा जाता है. इस अवसर पर बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ त्योहार मनाया जाता है. खास बात यह है कि इस दिन केले के पेड़ (कदली) से मां नंदा की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है.
मातारानी की महिमा का उल्लेख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो शेयर किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “अल्मोड़ा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक मां नंदा देवी का पावन मंदिर श्रद्धा, आस्था और विश्वास का दिव्य केंद्र है. पर्वतीय शिल्पकला से सुसज्जित यह प्राचीन मंदिर आदिशक्ति भगवती मां नंदा देवी को समर्पित है. आप भी अल्मोड़ा जनपद आगमन पर मां नंदा देवी के दर्शन अवश्य करें.”
