सड़क हादसे या गंभीर दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत ट्रॉमा इलाज मिलना जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा:सुप्रीम कोर्ट

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-ट्रॉमा इलाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा-हर घायल को तुरंत इलाज देना मौलिक अधिकार, एम्बुलेंस पर क्या निर्देश दिए?

 

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसे या गंभीर दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत ट्रॉमा इलाज मिलना जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी सेवाओं को 112 हेल्पलाइन से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-कुछ कहा…

नई दिल्ली

 

देश में सड़क हादसों और गंभीर दुर्घटनाओं में हर साल हजारों लोगों की मौत इलाज में देरी के कारण हो जाती है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी भी घायल व्यक्ति को तुरंत ट्रॉमा इलाज मिलना उसके जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने साफ कहा कि हादसे के बाद का हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है और इलाज में थोड़ी भी देरी किसी की जान ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया है कि देशभर में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया जाए और लोगों तक समय पर मदद पहुंचाने की एक समान व्यवस्था बनाई जाए।

 

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने मंगलवार को कई अहम अंतरिम आदेश जारी किए। अदालत ने कहा कि सड़क हादसों और अन्य आपात स्थितियों में लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी और एम्बुलेंस हेल्पलाइन को 112 नंबर से जोड़ें। अदालत ने कहा कि अलग-अलग हेल्पलाइन होने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनती है। एकीकृत व्यवस्था से राहत और बचाव कार्य तेज होगा। अदालत ने 112 हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।