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नीम से ज्यादा कड़वी और फायदेमंद भी! शरीर को कर दे टनाटन, लिवर की समस्या में भी रामबाण

चिरायता आयुर्वेद की सबसे कड़वी लेकिन सबसे असरदार औषधियों में गिनी जाती है. यह औषधीय पौधा इम्युनिटी बढ़ाने, खून साफ करने और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है. रीवा में पाई जाने वाली चिरायता बुखार, वायरल संक्रमण, एनीमिया और लिवर रोगों में लाभकारी मानी जाती है. इसके एंटी-वायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाचन, त्वचा और जोड़ों के दर्द में भी असर दिखाते हैं. जानिए चिरायता के फायदे, उपयोग और सावधानियां आयुर्वेद विशेषज्ञों की सलाह के साथ.

चिरायता के फायदे: रीवा को जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का खजाना कहा जाता है. यहां प्राकृतिक रूप से कई ऐसी औषधियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से होता आ रहा है. इन्हीं में से एक है चिरायता. यह एक बारहमासी औषधीय पौधा है, जो ठंडी जलवायु और पहाड़ी इलाकों में उगता है. स्वाद में बेहद कड़वी होने के बावजूद चिरायता को आयुर्वेद की सबसे असरदार औषधियों में गिना जाता है.
कड़वी जरूर है, लेकिन शरीर के लिए अमृत समान
चिरायता की कड़वाहट ही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है और खून को साफ करने का काम करती है. इसके नियमित और सीमित सेवन से इम्युनिटी मजबूत होती है, जिससे शरीर मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाता है.
बुखार, वायरल और लिवर के लिए रामबाण
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद त्रिपाठी बताते हैं कि चिरायता का उपयोग बुखार, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियों में बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद एंटी-वायरल गुण वायरल संक्रमण के लक्षणों को कम करते हैं. चिरायता एनीमिया में भी सहायक मानी जाती है, क्योंकि इसके पोषक तत्व खून बनाने में मदद करते हैं. लिवर के लिए भी यह औषधि बेहद फायदेमंद है. इसमें पाया जाने वाला ‘स्वेरचिरिन’ तत्व लिवर को नुकसान से बचाता है और हेपेटाइटिस जैसी समस्याओं में भी लाभ पहुंचाता है.
पाचन, त्वचा और जोड़ों के दर्द में भी असरदार
चिरायता पाचन तंत्र को मजबूत करती है. इसकी कड़वाहट पाचन रसों को सक्रिय करती है, जिससे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. आयुर्वेद में इसे भूख बढ़ाने, पेट के कीड़े खत्म करने और जोड़ों के दर्द को कम करने वाली औषधि भी माना गया है. त्वचा के लिए भी चिरायता फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा रोगों में राहत देते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं.
कैसे करें चिरायता का सेवन, जानिए सही तरीका
चिरायता का काढ़ा, पाउडर और चिरायता पानी अलग-अलग समस्याओं में उपयोग किया जाता है. काढ़ा इम्युनिटी और बुखार में लाभकारी होता है, पाउडर पाचन और खून साफ करने में मदद करता है, जबकि चिरायता का पानी डिटॉक्स के लिए उपयोग किया जाता है. हालांकि यह बहुत शक्तिशाली औषधि है, इसलिए अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है. लंबे समय तक इस्तेमाल से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. crimecap news किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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