‘मुसलमानों से कागज दिखाओ कहा, अब संतो से कह रहे’; शंकराचार्य विवाद पर कांग्रेस ने BJP को घेरा

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने और नोटिस दिए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने पूछा है कि क्या सरकार को किसी शीर्ष संत की हैसियत पर सवाल करने का अधिकार है। आइए जानते हैं आखिर कांग्रेस ने कागज दिखाओ वाली बात क्यों कही।
नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जिन लोगों ने कभी मुसलमानों से कागज दिखाओ कहा, वही अब हिंदू धर्म के शीर्ष संत से भी वही मांग कर रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या किसी सरकार, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को शंकराचार्य की हैसियत पर सवाल करने का अधिकार है। कांग्रेस ने इसे परंपराओं के खिलाफ और अभूतपूर्व करार दिया है।
नोटिस और रोक से क्यों भड़की कांग्रेस?
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने बताया कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के मौके पर संगम स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोका गया। इसके बाद मेला प्रशासन ने उनसे यह बताने को कहा कि वे शंकराचार्य की उपाधि का इस्तेमाल किस आधार पर कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि संत से आधी रात को जवाब मांगना अपमानजनक है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
धर्म और परंपरा पर चोट क्यों कहा?
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि शंकराचार्य सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक हैं और उनकी स्थिति पर सवाल उठाना किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। पार्टी का आरोप है कि जब तक संत सरकार की नीतियों पर सवाल नहीं उठाते थे, तब तक उन्हें सम्मान दिया जाता था, लेकिन जैसे ही उन्होंने गाय के मांस, अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और महाकुंभ के कथित कुप्रबंधन पर सवाल किए, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई।
कांग्रेस के आरोप क्या-क्या हैं?
- शंकराचार्य को संगम में शाही स्नान से रोका गया।
- 48 घंटे से अधिक समय से वे बिना अन्न-जल के धरने पर बैठे हैं।
- माफी मांगने के बजाय प्रशासन ने नोटिस जारी किया।
- शंकराचार्य की हैसियत पर सवाल उठाना परंपरा के खिलाफ बताया गया।
- पार्टी ने इसे अहंकार की पराकाष्ठा करार दिया।
सीएम और पीएम पर सीधे सवाल
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या किसी सरकार को शंकराचार्य की वैधता तय करने का अधिकार है। खेड़ा ने कहा कि जब प्रधानमंत्री ने संत के सामने सिर झुकाया था, तब वे शंकराचार्य थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने सत्ता से सवाल किए, उनसे कागज मांगे जाने लगे।
धरना और बढ़ता तनाव
विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला क्षेत्र में धरना शुरू कर दिया और वरिष्ठ अधिकारियों से सार्वजनिक माफी की मांग की। कांग्रेस का दावा है कि यह मामला केवल एक संत का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के सम्मान का है। पार्टी ने चेतावनी दी कि देशभर के हिंदू इस घटनाक्रम को देख रहे हैं और इसका राजनीतिक असर पड़ेगा।




