बुजुर्ग महिला को ‘सुप्रीम’ राहत, शीर्ष अदालत ने की इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना; FIR पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 71 साल की बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत दी और इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमानत अस्वीकार करने के फैसले की आलोचना की। कोर्ट ने वकील दादूराम शुक्ला के खिलाफ 10,000 रुपये के जमानती वारंट जारी किए और महिला की गिरफ्तारी रोकने के निर्देश दिए।
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक पुराने और अहम मामले में सुनवाई करते हुए 71 साल की बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें महिला की अग्रिम जमानत याचिका को बिना सही वजह ठुकरा दिया गया था। कोर्ट ने शिकायतकर्ता वकील दादूराम शुक्ला के खिलाफ 10,000 रुपये का जमानती वॉरंट जारी किया, ताकि उनकी अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके और उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जा सके कि क्यों उन पर जुर्माना न लगाया जाए।
जानिए पूरा मामला?
गौरतलब है कि पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 27 मई 2025 को महिला की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी क्योंकि वह तय तारीख पर पुलिस के सामने हाजिर नहीं हुई थीं। महिला ने कहा कि वह तब बीमार थीं, इसलिए 19 मई को पुलिस के सामने नहीं जा सकीं, लेकिन 26 मई को अपनी बात रिकॉर्ड करवाई।
एफआईआर में कहा गया है कि 20 अगस्त 1971 को एक फर्जी जमीन का कागज बनाया गया था, जिसे 7 सितंबर 2020 को रद्द कर दिया गया था। एफआईआर में यह भी बताया गया कि महिला, मुख्य आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी की सास हैं, जो एक गिरोह का सदस्य है और कई ऐसे फर्जी कागज बनाने में शामिल है।




