वक्फ संशोधन कानून पर पहली बार बोले PM मोदी, सुनते ही विपक्ष को लगी मिर्ची, देखें किसने क्या कहा?

दिल्ली

वक्फ बोर्ड संशोधन कानून 2025 पर पहली बार किसी सार्वजनिक मंच से पीएम मोदी ने अपना रिएक्शन दिया है. उन्होंने वक्फ को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच न केवल चिंता को दूर किया है, बल्कि उन्होंने कांग्रेस पर इस कानून को लेकर सालों राजनीति का भी आरोप लगाया है. उनके इस कमेंट के बाद विपक्ष का भी रिएक्शन आया है.

हाइलाइट्स
  • पीएम मोदी ने वक्फ संशोधन कानून पर पहली बार प्रतिक्रिया दी.
  • विपक्ष ने वक्फ कानून को विभाजनकारी बताया.
  • बीजेपी ने कानून के फायदे बताने के लिए कमेटी बनाई.
Rising Bharat Summit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच ‘Rising India Summit 2025’ के मंच से वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है. उनके वक्फ कानून पर कमेंट के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है. भाजपा ने इसे “उकसाने वाली लॉबी के खिलाफ मजबूत जवाब” करार दिया, जबकि विपक्ष ने इस कानून को “विभाजनकारी” बताया.
मंगलवार 8 अप्रैल को नेटवर्क18 के मंच से संबोधन करते हुए पीएम मोदी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ करार दिया. उन्होंने कहा कि नया कानून गरीब पसमांदा मुसलमानों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करेगा. पीएम ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया.
उनकी पार्टी से क्या प्रतिक्रिया आई
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पीएम के बयान का समर्थन करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर उकसाने वाली लॉबी को करारा जवाब दिया है. विपक्ष सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति कर रहा है.’ बीजेपी का मानना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के लिए पारदर्शिता और न्याय लाएगा.
विपक्ष का पलटवार
विपक्षी दलों ने पीएम के बयान की कड़ी आलोचना की है. पीएम मोदी के बयान के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और एआईएडीएमके ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया. चलिए देखते हैं कि किस पार्टी ने क्या कहा? 
  • कांग्रेस: तेलंगाना से कांग्रेस एमएलसी अडानायकी दयाकर ने कहा, “मोदी भारत के पीएम हैं, लेकिन वे हमेशा धर्म, क्षेत्र, जाति और लिंग के नाम पर लोगों को बांटते हैं. अब वे मुसलमानों को भी बांटना चाहते हैं. यह कानून हिंदू-मुस्लिम के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय को भी विभाजित करता है.’
  • समाजवादी पार्टी: सपा प्रवक्ता अमीक जमेई ने कहा, ‘बीजेपी के नेतृत्व में भारत डूब रहा है, उभर नहीं रहा. 25 करोड़ मुसलमानों को हिंद महासागर में नहीं डुबोया जा सकता. काले कानूनों से शिया इमामबाड़ों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर कब्जा नहीं किया जा सकता.’
  • एआईएडीएमके: प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा, ‘संविधान हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है, लेकिन बीजेपी के सुधार एक वर्ग को कुचलने वाले लगते हैं. वक्फ संशोधन में हितधारकों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?’
विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 15 अप्रैल को सुनवाई के लिए सहमति दी है.
बीजेपी ने बनाई 4 नेताओं की कमेटी
बीजेपी ने इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाने के लिए चार नेताओं की एक कमेटी गठित की है. इसमें अनिल एंटनी, जमाल सिद्दीकी, राधामोहन दास अग्रवाल और दुष्यंत गौतम शामिल हैं. यह कमेटी जिला स्तर पर छोटी सभाओं से लेकर सेमिनार तक कई कार्यक्रम आयोजित करेगी. पार्टी का लक्ष्य यह संदेश देना है कि यह कानून आम लोगों के लिए पारदर्शिता, न्याय और लैंगिक समानता सुनिश्चित करेगा।