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Diwali Puja: दिवाली पर श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. श्री यंत्र को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. यह कई त्रिकोणों से मिलकर बना एक विशेष धार्मिक और ज्यामितीय आकार होता है. इसमें नौ आपस में जुड़े त्रिकोण होते हैं, जो मिलकर एक खास आकृति बनाते हैं.
ऋषिकेश
दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है. इस दिन घरों में साफ-सफाई और पूजा-पाठ के साथ कई लोग श्री यंत्र की स्थापना भी करते हैं. मान्यता है कि श्री यंत्र की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है. लेकिन बाजार में कई तरह के श्री यंत्र मिलते हैं, ऐसे में सही श्री यंत्र का चुनाव करना जरूरी है.
बातचीत के दौरान ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने बताया कि श्री यंत्र को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. यह कई त्रिकोणों से मिलकर बना एक विशेष धार्मिक और ज्यामितीय आकार होता है. इसमें नौ आपस में जुड़े त्रिकोण होते हैं, जो मिलकर एक खास आकृति बनाते हैं. हिंदू धर्म में इसे धन, सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि श्री यंत्र की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. यही वजह है कि दिवाली जैसे शुभ अवसर लोग अपने घर और पूजा स्थल में श्री यंत्र की स्थापना करते हैं.
16D श्री यंत्र माता लक्ष्मी का विशेष स्वरूप
उन्होंने बताया कि बाजार में कई तरह के श्री यंत्र मिल जाते हैं, लेकिन 16D श्री यंत्र को माता लक्ष्मी का विशेष स्वरूप माना जाता है. इसका आकार पिरामिड जैसा होता है और इसमें कई खाने बने होते हैं. माना जाता है कि हर खाने का अपना अलग महत्व है और ये अलग-अलग देवी-देवताओं से जुड़े होते हैं. सबसे ऊपर के खाने में शिवलिंग के रूप में पूजा की जाती है, जबकि दूसरे खानों में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की पूजा का महत्व बताया गया है.
उन्होंने बताया कि बाजार में कई तरह के श्री यंत्र मिल जाते हैं, लेकिन 16D श्री यंत्र को माता लक्ष्मी का विशेष स्वरूप माना जाता है. इसका आकार पिरामिड जैसा होता है और इसमें कई खाने बने होते हैं. माना जाता है कि हर खाने का अपना अलग महत्व है और ये अलग-अलग देवी-देवताओं से जुड़े होते हैं. सबसे ऊपर के खाने में शिवलिंग के रूप में पूजा की जाती है, जबकि दूसरे खानों में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की पूजा का महत्व बताया गया है.
16 कोटि देवी-देवताओं का वास
कहा जाता है कि इसमें 16 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है और एक साथ सभी की पूजा की जा सकती है. इसे साक्षात माता लक्ष्मी का 16D रूप भी माना जाता है. मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए स्फटिक का श्री यंत्र शुभ माना जाता है. इसे चांदी की प्लेट पर रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है. वहीं तांबे पर मढ़े श्री यंत्र को घर के मंदिर, तिजोरी या दीवार के सामने भी स्थापित करना चाहिए.
