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ब्रिटेन में कई संगठनों और छात्र समूहों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन कर कॉकराच जनता पार्टी की मांगों का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई। घटना ने भारतीय…
London
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब ब्रिटेन तक पहुंच गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे विदेशी धरती से भारत का माहौल बिगाड़ने का षडयंत्र बताया जा रहा है। अमेरिका से मोदी सरकार के खिलाफ फंडिंग की खबरों के बीच अब ब्रिटेन से भी कॉकरोच जनता पार्टी को शय का मामला सामने आया है। भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के समर्थन में ब्रिटेन में रह रहे विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया।
मंगलवार शाम हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने भारत में मताधिकार की रक्षा के नाम पर जारी आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग का समर्थन किया।इस प्रदर्शन में ‘साउथ एशिया सॉलिडैरिटी ग्रुप’, ‘कैम्ब्रिज साउथ एशियन फोरम अगेंस्ट हिंदुत्व’, ‘इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन’ और ‘एसओएएस आंबेडकर सोसाइटी’ जैसे संगठन शामिल थे। इन समूहों की भागीदारी ने भारत के चुनावी विवाद को विदेशी धरती पर उठाने और इसके राजनीतिक संदेश को लेकर बहस को जन्म दिया है।
भारत के आंतरिक मुद्दे पर ब्रिटेन में लामबंदी
भारत में SIR को लेकर कॉकराच जनता पार्टी (CJP), कुछ छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इन संगठनों की मांग है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया रद्द की जाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।इसी मुद्दे को लेकर लंदन में आयोजित प्रदर्शन में भी इन मांगों को उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाए। भारत के चुनावी और संवैधानिक मुद्दे पर विदेश में प्रदर्शन से सवाल उठता है कि भारत के घरेलू राजनीतिक विवादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने से किस तरह का राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मोदी सरकार के आलोचक संगठनों की भूमिका
प्रदर्शन में शामिल ‘साउथ एशिया सॉलिडैरिटी ग्रुप’ भारत की मौजूदा सरकार की नीतियों का मुखर आलोचक रहा है। संगठन अपनी सार्वजनिक सामग्री में SIR रद्द करने और मोदी सरकार के खिलाफ राजनीतिक विरोध की बात उठाता रहा है। संगठन से जुड़ी मुक्ति शाह ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े जनआंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने ब्रिटेन में इस मुद्दे के महत्व का उल्लेख करते हुए वैश्विक धुर दक्षिणपंथी राजनीति की भूमिका पर भी टिप्पणी की। लंदन में प्रदर्शन और ब्रिटेन के दूसरे शहरों में हुई गतिविधियों ने भारत के घरेलू राजनीतिक विवाद के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप पर ध्यान खींचा है। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय निर्वाचन व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
इस तरह की गतिविधियां विदेशों में किसी सरकार, विदेशी संस्था या दानदाता ने प्रदर्शन आयोजित कराने के लिए धन दिया या इसके पीछे भारत में अस्थिरता पैदा करने का उद्देश्य हो सकता है। ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की ब्रिटेन इकाई ने भी इसी सप्ताह कार्डिफ, लीड्स और एडिनबर्ग में प्रदर्शन किए। इन कार्यक्रमों में भारत में आंदोलन कर रही CJP के प्रदर्शनों को हवा दी जा रही है। भारत के चुनावी विवादों को विदेश में उठाने की घटनाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इन अभियानों का उद्देश्य केवल राजनीतिक समर्थन जुटाना है या उनके जरिए मोदी सरकार की अंतर्राष्ट्रीय छवि बिगाड़ने के लिए किया जा रहा है।
