जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की पाबंदी क्यों? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, दिल्ली पुलिस के ऑर्डर को चुनौती

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दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में 11 अक्टूबर को जारी आदेश को मनमाना बताते हुए कहा गया है कि प्रदर्शन स्थलों को दूर-दराज के इलाकों में स्थानांतरित करने से नागरिकों के अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.

 

दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और तीन दूसरे प्रदर्शन स्थलों को अधिसूचित करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में रविवार 11 अक्टूबर को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर को चुनौती देते हुए इसे मनमाना और प्रक्रिया संबंधी खामियों से ग्रस्त बताया गया है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई की तारीख कल यानी 15 अक्टूबर को तय कर सकता है.

याचिका में क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदर्शनों को दूर-दराज के इलाकों में स्थानांतरित करने से नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे. याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार का हवाला दिया गया है. इसमें दलील दी गई है कि दूरस्थ स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति देने से ये मौलिक अधिकार प्रभावहीन हो सकते हैं.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ फैसले का भी हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, नए प्रदर्शन स्थलों के संचालन को लेकर संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अब तक जारी नहीं की गई है. याचिका में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे मनमाना बताया गया है.

दिल्ली मेट्रो और ट्रेनें बंद करने के मामले पर कल सुनवाई

इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों से पहले दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान से जुड़ी याचिकाओं पर 15 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने जिन दो याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, इनमें से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट के 8 अक्टूबर के आदेश की कथित अवमानना के खिलाफ अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करती है, जिसने दिल्ली मेट्रो, रेलवे सेवाओं और नागरिक सुविधाओं पर लगी पूर्ण पाबंदी को हटाया था.