CEC ज्ञानेश कुमार को मिली कानूनी छूट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा INDIA ब्लॉक

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मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को 2023 के अधिनियम के तहत मिले व्यापक कानूनी संरक्षण के खिलाफ अब INDIA ब्लॉक ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस, टीएमसी, लेफ्ट और आरजेडी जैसे प्रमुख विपक्षी दल इस विवादास्पद प्रावधान को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर करने जा रहे हैं. विपक्ष का तर्क है कि कार्यकाल के बाद भी मिलने वाली यह सुरक्षा प्रशासनिक जवाबदेही को कमजोर करती है.

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को 2023 के कानून के तहत मिले कानूनी संरक्षण के खिलाफ INDIA ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का बड़ा फैसला किया है. कांग्रेस, टीएमसी, लेफ्ट और आरजेडी सहित विपक्ष के तमाम दल इस विवादास्पद कानून के खिलाफ शीर्ष अदालत में संयुक्त याचिका दाखिल करेंगे. इस कानूनी प्रावधान के मुताबिक, किसी भी वर्तमान या पूर्व CEC और EC के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान आधिकारिक कर्तव्यों के तहत किए गए कार्यों को लेकर कोई भी सिविल या क्रिमिनल केस नहीं चलाया जा सकता है. हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह छूट केवल आधिकारिक दायित्वों तक ही सीमित है और किसी भी निजी कृत्य या ड्यूटी से बाहर किए गए कार्यों पर यह कानूनी संरक्षण लागू नहीं होगा. इसके बावजूद, विपक्षी दलों का मानना है कि इस तरह का सुरक्षा कवच चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर SIR जैसे संवेदनशील मामलों में यह देखना अहम होगा कि संबंधित कार्रवाई आधिकारिक ड्यूटी के दायरे में आती है या नहीं.

2023 के कानून के प्रावधान और कानूनी संरक्षण का दायरा
साल 2023 के चुनाव आयोग अधिनियम के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को एक विशेष कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया. कानून के मुताबिक यह सुरक्षा केवल उनके पद पर रहते हुए ही नहीं, बल्कि पद छोड़ने के बाद भी प्रभावी बनी रहती है. कानून की शब्दावली में स्पष्ट रूप से “is or was” CEC/EC का जिक्र किया गया है, जिसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति जो वर्तमान में इस पद पर है या पहले रह चुका है, वह इसके दायरे में आता है. इसके तहत कार्यकाल के दौरान अपने आधिकारिक कर्तव्यों के तहत किए गए किसी भी कार्य या फैसले को लेकर उनके खिलाफ कोई भी सिविल या क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया जा सकता है.
क्या यह एक ब्लैंकेट इम्युनिटी है?
कानूनी विशेषज्ञों और प्रावधानों के अनुसार, यह किसी भी तरह की ‘ब्लैंकेट इम्युनिटी’ (पूर्ण और अंदेशामुक्त छूट) नहीं है. यह सुरक्षा केवल आधिकारिक ड्यूटी, कार्यों या आधिकारिक बयानों तक ही सीमित है. यदि कोई कृत्य निजी क्षमता में किया गया है या वह आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे से पूरी तरह बाहर है तो ऐसी स्थिति में सेक्शन 16 के तहत मिलने वाला यह कानूनी संरक्षण लागू नहीं होगा. एसआईआर (SIR) या इसी तरह के अन्य नीतिगत मामलों में सबसे बड़ा कानूनी सवाल यही होगा कि संबंधित कार्रवाई या निर्णय CEC या EC की आधिकारिक ड्यूटी के तहत आता है या नहीं. इसी कानूनी बिंदु को आधार बनाकर विपक्षी दल अपनी दलीलें शीर्ष अदालत के सामने रखेंगे.
सवाल-जवाब
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण किस वर्ष के कानून के तहत दिया गया है?
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को यह कानूनी संरक्षण वर्ष 2023 के चुनाव आयोग अधिनियम के तहत दिया गया है.
क्या यह कानूनी संरक्षण पद छोड़ने के बाद भी पूर्व चुनाव आयुक्तों पर लागू होता है?
हाँ, कानून में “is or was” का प्रावधान होने के कारण यह संरक्षण पद छोड़ने के बाद भी पूर्व CEC और EC पर लागू रहता है.
क्या यह संरक्षण अधिकारियों के लिए एक पूर्ण (ब्लैंकेट) इम्युनिटी है?
नहीं, यह ब्लैंकेट इम्युनिटी नहीं है; यह सुरक्षा केवल आधिकारिक कर्तव्यों (official duty) के दौरान किए गए कार्यों तक ही सीमित है.