सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पीठासीन अधिकारी के कामकाज पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारी पर एनडीपीएस और एससी/एसटी मामलों में आरोपियों को राहत देने के आरोप हैं।
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनडीपीएस और एससी/एसटी अत्याचार से जुड़े कई मामले खुद के पास ले लिए और आरोपियों को बरी कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि बीच में ही सरकारी वकील को भी बदल दिया गया। इसके साथ ही नए वकील के पास सिर्फ चार महीने का अनुभव है। बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह सबसे वरिष्ठ सरकारी वकील को ढूंढे, जिसे इस मामले में सेशन ट्रायल चलाने का काफी अनुभव हो, और दो हफ्ते में कोर्ट को जानकारी दे।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की। 6 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
3 अक्तूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद, नाराज किसानों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
