न्यायपालिका ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते अपराध पर सक्रियता से प्रतिक्रिया दी: सीजेआई सूर्यकांत

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नयी दिल्ली

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते अपराध पर संसद की ओर से कानून बनाए जाने का इंतजार करने के बजाय सक्रियता से प्रतिक्रिया दी है।

प्रधान न्यायाधीश ने लंदन में आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हाल में ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ धोखाधड़ी का स्वत: संज्ञान लिया था।

उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध में जालसाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या नौकरशाह बताकर लोगों को ठगते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके जवाब में न्यायालय ने केंद्र व राज्यों को इस समस्या की व्यापकता का आकलन करने का निर्देश दिया और ऐसा अलग अपराध बनाने का आह्वान किया है, जिसमें नुकसान की गंभीरता के अनुरूप दंड का प्रावधान हो।’’

 

 

चीफ जस्टिस ने किन बातों को रेखांकित किया?

 

  • सुप्रीम कोर्ट ने इस उभरते साइबर फ्रॉड को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
  • ऐसे मामलों में अपराध निर्धारित करने के अलग प्रावधान और नुकसान के अनुरूप सजा के नियम बनाने चाहिए।
  • आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताए जाने चाहिए।
  • बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के बावजूद वैश्विक पैमाने पर अवैध धन की बरामदगी बेहद कम, ये चिंताजनक।
  • आर्थिक अपराध और अवैध संपत्ति की वापसी के लिए देशों के बीच सहयोग अहम।

 

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका उभरते धोखाधड़ी वाले अपराधों पर सक्रियता से प्रतिक्रिया देती है, न कि संसद द्वारा इस पर कदम उठाए जाने का इंतजार करती है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए समय के साथ बदलती चुनौतियों को समझना और उनके अनुरूप प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।

 

गिरफ्तारी पर चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल मौखिक रूप से गिरफ्तारी के कारण पढ़कर सुना देना पर्याप्त नहीं है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए सीजेआई ने बताया कि इस मामले में अदालत ने गिरफ्तारी को कानूनी माना, लेकिन इसके बावजूद जमानत दी। इसका आधार यह सिद्धांत था कि मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत को किसी दूसरे रूप में सजा में तब्दील नहीं किया जा सकता।

मनी लॉन्ड्रिंग पूरी दुनिया के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक स्तर को बेहद गंभीर चुनौती बताते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, अगर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं, तो दुनिया में एक साल में जितने पैसों का अवैध लेन-देन किया जाता है, उससे धरती पर मौजूद करीब आठ अरब लोगों में से हर एक के लिए एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है। इसके बाद भी पैसा बच सकता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध धन के प्रवाह के बावजूद, केवल एक प्रतिशत से कम अवैध संपत्ति ही बरामद हो पाती है। यह हालात बताते हैं कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए जांच एजेंसियों, न्यायपालिका और विभिन्न देशों के बीच बेहतर अंतरराष्ट्रीय समन्वय जरूरी है।

CJI सूर्यकांत के संबोधन की खास झलकियां

 

  • आर्थिक अपराध और सरकारी धन के दुरुपयोग की चुनौती नई नहीं, तकनीक से समस्या जटिल बनी।
  • कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख कर बोले- राजस्व को संभालने वाला अधिकारी बिना उसमें से कुछ हिस्सा लिए रह जाए, यह उतना ही कठिन है जितना जीभ की नोक पर रखे शहद या विष का स्वाद लिए बिना रह जाना।
  • आर्थिक अपराध देशों की सीमाओं और संप्रभुता से परे।
  • सतर्कता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानून, धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई में सबसे अहम हथियार।
  • न्यायिक, प्रशासनिक और जांच तंत्र को मिलकर अवैध धन और धोखाधड़ी के नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी।

लंदन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मकसद बताते हुए सीजेआई ने कहा, सामान्य परिस्थितियों में देशों की कानूनी व्यवस्थाएं विदेशी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखती हैं। हालांकि, अब आर्थिक अपराधों से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग आवश्यक है।