West Bengal Ration Card Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर राशन सूची से नाम काटे जाने के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी। याचिकाकर्ता का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया में बाहर हुए लोगों के राशन कार्ड भी रद्द किए जा सकते हैं। राज्य सरकार पहले ही राशन लाभार्थियों के सत्यापन का आदेश जारी कर चुकी है।
नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और उसके आधार पर राशन कार्ड लाभार्थियों के नाम काटे जाने के आरोपों का मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने और इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले पर पहले हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके राशन कार्ड भी रद्द किए जा सकते हैं। वकील ने अदालत को बताया कि कई लाभार्थियों के नाम राशन सूची से हटने का खतरा है, जिससे वे सरकारी खाद्यान्न योजना से वंचित हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। उस समय भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। बुधवार को याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने और हाईकोर्ट जाने की अनुमति मांगी, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
राशन कार्ड सत्यापन को लेकर राज्य सरकार का क्या आदेश?
4 जून को पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राज्यभर में राशन कार्ड लाभार्थियों के सत्यापन और अयोग्य लाभार्थियों के नाम हटाने का आदेश जारी किया था। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामों से जुड़ी बताई गई थी। विभाग ने 15 जून तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा था।
किन लोगों के नाम जांच के दायरे में?
सरकारी आदेश के मुताबिक, ऐसे लोग जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट मतदाता (एएसडीडी) के रूप में चिह्नित किए गए हैं, उनकी जांच की जा रही है। इसके अलावा, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिनके आवेदन खारिज हुए या जिनके नाम बाद में हटाए गए, वे भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने एसआईआर ट्रिब्यूनल में अपील की है या नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत आवेदन किया है, उनके नाम अपील या आवेदन के निपटारे तक राशन डेटाबेस में बने रहेंगे।
