यूपी के लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी आग से कम से कम 13 लोगों की मौत की खबर है। इस घटना ने हालिया समय में हुए कुछ अग्निकांडों की दर्दनाक यादों को फिर से लोगों के जहन में ला दिया। यह घटनाएं उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के राज्यों में हुईं। आइये जानते हैं ऐसे ही अग्निकांड की पिछली कुछ घटनाओं, उनके कारणों और उन मामलों में हुई कार्रवाई के बारे में…
लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार (22 जून) को एक बड़ा हादसा हुआ। यहां के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में दोपहर में भीषण आग भड़क गई। इस कोचिंग सेंटर में फंसकर अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में अधिकतर बच्चों की मौत होने का अंदेशा है। इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार नजर रख रहे हैं और राहत-बचाव कार्य की जानकारी हासिल कर रहे हैं।
लखनऊ में हुए इस अग्निकांड ने बीते कुछ वर्षों के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों की बुरी यादों को ताजा कर दिया। खासकर बीते साल के अग्निकांडों की, जिनकी चपेट में आकर कई छात्र-छात्राओं की जान चली गई। फिर चाहे गुजरात के सूरत की बात हो या दिल्ली के मुखर्जी नगर में हुए अग्निकांड की। हर बार इन घटनाओं के बाद जांच होती है और कार्रवाई की बातें भी, लेकिन इसके बाद भी दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सका है।
भारत में यूं तो हर वर्ष दर्जनों अग्निकांड दर्ज किए जाते हैं, जिनमें मृतकों का आंकड़ा भी उच्च स्तर पर रहता है। हालांकि, आज बात करते हैं कोचिंग सेंटरों में हुए हादसों की, जिन्होंने बीते कुछ वर्षों में पूरे देश को दहलाया।
1. सूरत कोचिंग सेंटर अग्निकांड, गुजरात
- आग की शुरुआत इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगे मुख्य बिजली के मीटर बॉक्स में एक जोरदार धमाके और शॉर्ट सर्किट के साथ हुई।
- चूंकि मीटर बॉक्स मुख्य सीढ़ियों के ठीक पास था, इसलिए आग और उससे निकला घना, जहरीला धुआं तेजी से एकमात्र संकरी सीढ़ी के रास्ते ऊपर की ओर चढ़ने लगा।
- इसके चलते छात्रों के नीचे उतरने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। उस वक्त बिल्डिंग के अंदर अलग-अलग मंजिलों पर करीब 250 से 300 छात्र क्लास ले रहे थे।
- हॉल में धुआं भरने के कारण छात्रों का दम घुटने लगा। कोई दूसरा रास्ता न होने पर छात्रों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े और एसी के तारों, रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे लटककर नीचे कूदने की कोशिश की।
स्थान और कारण: पूर्वी दिल्ली के विवेक (विवेक विहार) इलाके में एक आवासीय इमारत में देर रात भीषण आग लग गई। यह हादसा एसी ब्लास्ट और उसके बाद हुए शॉर्ट-सर्किट के कारण हुआ। आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी और तीसरी मंजिल पर सो रहे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ शव सीढ़ियों पर और कुछ बेड पर ही झुलसी हुई अवस्था में मिले।
7. दिल्ली: हौज खास अग्निकांड
स्थान और कारण: उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में यह भीषण आग लगी। इसमें पांच लोगों की मौत हुई। कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए या धुएं के कारण बीमार हो गए। बताया गया कि आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू वॉर्ड में लगी। प्राथमिक जांच के मुताबिक, आईसीयू में लगे एसी और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की हैवी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग भड़की।
आग लगने के बाद पूरे वार्ड में तेजी से गाढ़ा काला धुआं फैल गया। चूंकि मरने वाले मरीज गंभीर हालत में और बेड पर थे, वे खुद उठकर भागने में असमर्थ थे। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। जांच में सामने आया कि आपातकालीन स्थिति में अस्पताल के आंतरिक सुरक्षा अलार्म और फायर फाइटिंग सिस्टम ने काम नहीं किया। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इमारत में कोई रैंप या बाहरी आपातकालीन निकास (फायर एस्केप) नहीं बना था। राज्य सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और पीड़ितों के परिवारों के लिए चार लाख रुपये के मुआवजे
क्या कार्रवाई हुई: बिहार सरकार ने घटना के तुरंत बाद मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन (ब्रह्मपुरा) में एफआईआर दर्ज की गई। अस्पताल के संचालन को जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया और सरकार ने चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की।
