लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: गुजरात से दिल्ली तक दर्ज हुईं ऐसी घटनाएं, कब-कितने हुए हताहत, क्या हुई कार्रवाई?

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यूपी के लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी आग से कम से कम 13 लोगों की मौत की खबर है। इस घटना ने हालिया समय में हुए कुछ अग्निकांडों की दर्दनाक यादों को फिर से लोगों के जहन में ला दिया। यह घटनाएं उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के राज्यों में हुईं। आइये जानते हैं ऐसे ही अग्निकांड की पिछली कुछ घटनाओं, उनके कारणों और उन मामलों में हुई कार्रवाई के बारे में…

लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार (22 जून) को एक बड़ा हादसा हुआ। यहां के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में दोपहर में भीषण आग भड़क गई। इस कोचिंग सेंटर में फंसकर अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में अधिकतर बच्चों की मौत होने का अंदेशा है। इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार नजर रख रहे हैं और राहत-बचाव कार्य की जानकारी हासिल कर रहे हैं।

 

लखनऊ में हुए इस अग्निकांड ने बीते कुछ वर्षों के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों की बुरी यादों को ताजा कर दिया। खासकर बीते साल के अग्निकांडों की, जिनकी चपेट में आकर कई छात्र-छात्राओं की जान चली गई। फिर चाहे गुजरात के सूरत की बात हो या दिल्ली के मुखर्जी नगर में हुए अग्निकांड की। हर बार इन घटनाओं के बाद जांच होती है और कार्रवाई की बातें भी, लेकिन इसके बाद भी दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सका है।

भारत में यूं तो हर वर्ष दर्जनों अग्निकांड दर्ज किए जाते हैं, जिनमें मृतकों का आंकड़ा भी उच्च स्तर पर रहता है। हालांकि, आज बात करते हैं कोचिंग सेंटरों में हुए हादसों की, जिन्होंने बीते कुछ वर्षों में पूरे देश को दहलाया।

1. सूरत कोचिंग सेंटर अग्निकांड, गुजरात

 

 

 

 

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम, आग का क्या कारण
बताया जाता है कि यह अग्निकांड कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर अचानक शॉर्ट सर्किट से हुआ। हालांकि, इमारत में आग बुझाने के उपकरण मौजूद थे, लेकिन कोचिंग सेंटर के अंदर का इंफ्रास्ट्रक्चर घातक साबित हुआ।

दरअसल, बड़े क्लासरूम को प्लाईवुड और प्लास्टिक के पार्टिशन लगाकर छोटे-छोटे कमरों में बांटा गया था। हर रूम में लगे एयर कंडीशनर (एसी) के आउटर कंप्रेसर बाहर की तरफ थे। जब शॉर्ट सर्किट की वजह से बाहर धुआं फैला, तो एसी के कंप्रेसर ने उस घने और जहरीले धुएं (कार्बन मोनोऑक्साइड) को खींचकर सीधे क्लासरूम के अंदर फेंकना शुरू कर दिया। चूंकि, कमरे चारों तरफ से कांच की खिड़कियों से पूरी तरह पैक थे, इसके चलते धुआं बाहर नहीं निकल पाया और कमरे गैस चैंबर बन गए।

घटना में कितने हताहत हुए?

  • इस हादसे में एक सात साल के बच्चे और एक 51 वर्षीय महिला टीचर की दम घुटने से मौत हो गई थी।
  • दो बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे और पांच से ज्यादा छात्रों को खिड़कियां तोड़कर निकाला गया, जिन्हें चोटें आई थीं।

क्या कार्रवाई की गई?
सूरत नगर निगम (एसएमसी) के तत्कालीन कमिश्नर एम. थेन्नारसन ने तुरंत इस बात की जांच के आदेश दिए कि एकेडमी ने वहां व्यावसायिक रूप से कोचिंग चलाने की वैध अनुमति ली थी या नहीं। इस हादसे के ठीक बाद सूरत अग्निशमन दल ने एक्शन मोड में आते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में चल रहे 230 से अधिक कोचिंग सेंटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनके फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू किए।

2. तक्षशिला आर्केड अग्निकांड, सूरत  

 

 

 

 

 

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम, आग का क्या कारण?

  • आग की शुरुआत इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगे हाई-वोल्टेज बिजली के मीटर या एयर कंडीशनर (एसी) के आउटर कंप्रेसर में शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई।
  • चौथी मंजिल (छत) पर प्लाईवुड, प्लास्टिक की शीटों और फाइबरग्लास का इस्तेमाल करके एक अवैध अस्थायी डोम (गुंबद) जैसा क्लासरूम बनाया गया था।
  • ग्राउंड फ्लोर से लगी आग बिजली की केबलों के सहारे बेहद तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ी। इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरी सीढ़ी थी।
  • आग लगते ही लकड़ी और लोहे की बनी वह सीढ़ी पूरी तरह जल गई और धुआं फैलने से नीचे उतरने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
  • क्लासरूम में बैठने के लिए रबर के टायरों और प्लाईवुड की बेंचों का इस्तेमाल किया गया था। आग पकड़ते ही इनसे काला और दम घोंटने वाला जहरीला धुआं निकला।

घटना में कितने हताहत हुए?
इस भयावह त्रासदी में 22 मासूम छात्रों, जिनमें ज्यादातर 15 से 22 वर्ष की छात्राएं थीं, की मौत हो गई थी। इनमें से कुछ छात्रों की मौत दम घुटने और जलने से हुई, जबकि कई छात्रों की मौत आग-धुएं से बचने के लिए चौथी मंजिल से नीचे छलांग लगाने के कारण हुई। इसके अलावा 17 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल और झुलस गए थे।

क्या कार्रवाई की गई?
पुलिस ने कोचिंग सेंटर के संचालक भार्गव भूटानी इमारत के बिल्डरों और सूरत नगर निगम के लापरवाह अधिकारियों सहित 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। फायर ब्रिगेड और नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही बरतने और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया।

इस घटना के बाद गुजरात सरकार ने पूरे राज्य के सभी कोचिंग सेंटर्स को तब तक के लिए बंद करने का आदेश दिया जब तक वे फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (एनओसी) न ले लें। इसके साथ ही नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) ने देशभर के कोचिंग सेंटर्स के लिए नए और कड़े सुरक्षा गाइडलाइंस जारी किए।

3. मुखर्जी नगर कोचिंग हादसा, दिल्ली

दिल्ली का मुखर्जी नगर इलाका देश का एक बहुत बड़ा कोचिंग हब है, जहां हर साल लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। साल 2023 में यहां हुए हादसे ने दिल्ली के इन संकरे कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी।

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम, आग का क्या कारण?

  • आग की शुरुआत इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगे मुख्य बिजली के मीटर बॉक्स में एक जोरदार धमाके और शॉर्ट सर्किट के साथ हुई।
  • चूंकि मीटर बॉक्स मुख्य सीढ़ियों के ठीक पास था, इसलिए आग और उससे निकला घना, जहरीला धुआं तेजी से एकमात्र संकरी सीढ़ी के रास्ते ऊपर की ओर चढ़ने लगा।
  • इसके चलते छात्रों के नीचे उतरने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। उस वक्त बिल्डिंग के अंदर अलग-अलग मंजिलों पर करीब 250 से 300 छात्र क्लास ले रहे थे।
  • हॉल में धुआं भरने के कारण छात्रों का दम घुटने लगा। कोई दूसरा रास्ता न होने पर छात्रों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े और एसी के तारों, रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे लटककर नीचे कूदने की कोशिश की।

 

 

घटना में कितने हताहत हुए?
इस हादसे में किसी भी छात्र की जान नहीं गई। हालांकि, इमारत से नीचे उतरने और रस्सियों से फिसलने की हड़बड़ी में 61 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कई छात्रों को फ्रैक्चर हुआ, जबकि दो छात्र गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण आईसीयू में भर्ती थे।

क्या कार्रवाई की गई?

  • दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं (लापरवाही से जीवन संकट में डालना) के तहत एफआईआर दर्ज की और कोचिंग सेंटर के मालिकों/प्रबंधन से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने दिल्ली फायर सर्विस और नगर निगम (एमसीडी) को कड़ी फटकार लगाई और मुखर्जी नगर के उन सभी कोचिंग सेंटर्स को बंद करने या सील करने का आदेश दिया जिनके पास वैध फायर एनओसी नहीं थी।
  • इस हादसे के बाद दिल्ली के मुखर्जी नगर, कालू सराय और करोल बाग जैसे इलाकों में हफ्तों तक बड़े पैमाने पर फायर सेफ्टी ऑडिट और अवैध रूप से चल रहे बेसमेंट कोचिंग सेंटर्स को सील करने की कार्रवाई की गई।

अब जानें- बीते कुछ महीनों के बड़े अग्निकांडों के बारे में

अगर सिर्फ 2025 से मध्य 2026 के बीच भारत में हुई बड़ी और दर्दनाक आग दुर्घटनाओं की ही बात कर लें तो इनमें हालिया मालवीय नगर अग्निकांड से लेकर गोवा में नाइटक्लब की आग की घटना तक शामिल है। इन सभी मामलों में कई लोगों की जान गई। शुरुआत में इन मामलों में कार्रवाई भी हुईं, हालांकि इसके बावजूद आग की घटनाओं को रोकने से जुड़े पुख्ता इंतजाम जमीन पर कम ही दिखे हैं।

1. दिल्ली: मालवीय नगर होटल अग्निकांड

 

 

 

 

घटना और कारण: मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टे होटल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक रेस्तरां में आग लगी, जिसने देखते ही देखते ऊपर के कमरों को चपेट में ले लिया। जांच में सामने आया कि होटल के पास फायर विभाग की एनओसी (एनओसी) नहीं थी और वहां क्षमता से तीन गुना अधिक लोग रुके हुए थे। यह पाया गया कि आरोपी ने मात्र छह कमरों की अनुमति लेकर अवैध रूप से 25 कमरे बना रखे थे।

क्या कार्रवाई हुई: दिल्ली पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया। उन पर बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या और धारा 326 के तहत मामला दर्ज किया गया। इस घटना में सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला यह हुआ कि दिल्ली के पर्यटन मंत्री ने सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी&बी) नीति को पूरी तरह वापस लेने का एलान कर दिया। इसके साथ ही दिल्ली के साउथ जोन में अवैध रूप से चल रहे सभी व्यावसायिक भवनों को सील करने का बड़ा अभियान शुरू किया गया।

2. गुजरात: डीसा पटाखा गोदाम विस्फोट

 

घटना और कारण: बनासकांठा जिले के दीसा कस्बे के पास दीपक फटाकड़ा नामक एक अवैध गोदाम में एल्युमिनियम पाउडर के संपर्क में आने से भीषण विस्फोट हुआ। इस फैक्ट्री का लाइसेंस पिछले साल ही खत्म हो चुका था, फिर भी इसे अवैध रूप से चलाया जा रहा था।

क्या कार्रवाई हुई: गुजरात हाईकोर्ट के कड़े रुख के कारण नगर निगम के कई आला अफसरों और अग्निशमन अधिकारियों को जेल भेजा गया। गुजरात सरकार ने पूरे राज्य में अवैध गोदामों को बंद करने का सबसे बड़ा अभियान चलाया।

3. तेलंगाना: गुलजार हौज त्रासदी 

 

घटना और कारण: चारमीनार के पास स्थित एक मिश्रित इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बिजली के मीटर बॉक्स में शॉर्ट सर्किट हुआ। लकड़ी के अंदरूनी हिस्सों और वेंटिलेशन (हवा की निकासी) न होने के कारण सीढ़ियां गैस चैंबर बन गईं और ऊपर सो रहे लोग धुएं से दम घुटने के कारण मारे गए।  मृतकों में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों के लोग (जिनमें 8 बच्चे और 6 महिलाएं) शामिल थे।

क्या कार्रवाई हुई: घटना की गंभीरता को देखते हुए (क्योंकि एक ही परिवार के 17 लोगों की जान गई थी) तेलंगाना सरकार ने तुरंत 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधि (मोतियों का व्यापार) और ऊपर आवासीय उपयोग हो रहा था। पुलिस ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध रूप से कमर्शियल लोड बढ़ाने और बिल्डिंग में वेंटिलेशन न रखने के आरोप में मकान मालिक/व्यावसायिक इकाई के खिलाफ गैर-इरादतन लापरवाही का आपराधिक मामला दर्ज किया।

4. गोवा: अर्पोरा नाइटक्लब अग्निकांड

 

स्थान और कारण: गोवा के अर्पोरा में स्थित बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर 2025 की रात को हुए भीषण अग्निकांड में सामने आया कि यहां बिना अनुमति के किए गए बिजली के काम (वायरिंग) कराए गए थे। इन्हीं के चलते नाइटक्लब में शॉर्ट सर्किट हुआ। अंदर लगी हुई अत्यधिक ज्वलनशील ध्वनिक फोम और सजावटी लकड़ियों ने आग को तेजी से फैलाया। इमारत में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) न होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए। मरने वालों में ज्यादातर नाइटक्लब में काम करने वाले प्रवासी मजदूर थे।

क्या कार्रवाई हुई: हादसे के अगले ही दिन गोवा पुलिस ने नाइटक्लब के मैनेजर को सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। क्लब के संचालकों (सौरभ लूथरा और अजय गुप्ता) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। दोनों को बाद में अदालत से अंतरिम राहत मिल गई।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने घटना स्थल का दौरा करने के बाद इस पूरी त्रासदी की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। सीएम के निर्देश पर उत्तरी गोवा प्रशासन ने तटीय बेल्ट (कलंगूट, बागा, अर्पोरा और अनजुना) में चल रहे सभी बड़े पब, क्लब और लाउंज की फायर सेफ्टी और लाइसेंस जांच शुरू की। जांच में यह भी पाया गया कि यह क्लब जमीन मालिकों के साथ कानूनी विवादों और बिना उचित फायर क्लीयरेंस के अवैध संशोधनों के साथ चल रहा था, जिसके बाद डिफॉल्टर क्लब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

5. मध्य प्रदेश: इंदौर आवासीय घर की आग

स्थान और कारण: तिलक नगर की ब्रजेश्वरी एनेक्स कॉलोनी में एक तीन मंजिला घर के बाहर लगे इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पॉइंट में अचानक धमाका हुआ। आग ने तुरंत घर के मुख्य प्रवेश और निकास द्वार को ब्लॉक कर दिया, जिससे अंदर सो रहे एक ही परिवार के लोगों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई। मृतकों में मकान मालिक, उनकी बहू और दो नाबालिग बच्चे शामिल थे।

क्या कार्रवाई हुई: शुरुआती फोरेंसिक और पुलिस जांच के बाद इंदौर पुलिस ने सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी का मामला पाया। घर के मालिक पर इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिंग व्यवस्था को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (जैसे उचित एमसीबी या स्टेबलाइजर) के खुले में लगाने के कारण लापरवाही से मौत मामला दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी  की टीम ने जांच में पाया कि घर में स्वीकृत बिजली लोड से कहीं अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था। इसके बाद विद्युत विभाग ने इंदौर के पॉश इलाकों में घरों में अवैध रूप से चल रहे हाई-लोड चार्जिंग पॉइंट्स का औचक निरीक्षण शुरू किया।

6. दिल्ली: विवेक विहार और हौज खास में आग की घटना

 

स्थान और कारण: पूर्वी दिल्ली के विवेक (विवेक विहार) इलाके में एक आवासीय इमारत में देर रात भीषण आग लग गई। यह हादसा एसी ब्लास्ट और उसके बाद हुए शॉर्ट-सर्किट के कारण हुआ। आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी और तीसरी मंजिल पर सो रहे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ शव सीढ़ियों पर और कुछ बेड पर ही झुलसी हुई अवस्था में मिले।

7. दिल्ली: हौज खास अग्निकांड

 

 

स्थान और कारण: 27 मई की रात लगभग 11:15 बजे दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास में स्थित एक तीन मंजिला आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई। 1968 बैच के हरियाणा कैडर के वरिष्ठ, प्रतिष्ठित और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार (80) की इस हादसे में मौत हो गई थी। शुरुआती पुलिस और फॉरेंसिक जांच के अनुसार, घर के ग्राउंड फ्लोर पर लगे एक पुराने एयर कंडीशनर के इंडोर यूनिट में अचानक हुए ब्लास्ट (धमाके) और शॉर्ट-सर्किट के कारण यह आग लगी। आग तेजी से लकड़ी के महंगे फर्नीचर, पर्दों और खिड़कियों में फैल गई। हादसे के वक्त घर में पूर्व आईएएस अधिकारी, उनकी पत्नी, बेटा और दो घरेलू सहायक मौजूद थे। उनके बेटे और सहायकों ने व्हीलचेयर पर रहने वाली उनकी पत्नी को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया। धनेंद्र कुमार बेडरूम से सटे बाथरूम के पास फंस गए। कमरा बहुत तेजी से घने जहरीले धुएं से भर गया, जिससे वे बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत एम्स ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृत्यु का प्राथमिक कारण धुएं के कारण दम घुटने को बताया गया।

क्या कार्रवाई हुई: पूर्व आईएएस धनेंद्र कुमार और विवेक विहार की घटनाओं के बाद, जो सीधे एसी ब्लास्ट और हैवी शॉर्ट सर्किट से जुड़ी थीं, दिल्ली फायर सर्विसेज और एमसीडी ने संयुक्त रूप से सभी पुरानी आवासीय सोसायटियों के लिए इलेक्ट्रिकल लोड ऑडिट अनिवार्य करने की गाइडलाइन जारी की। पुलिस ने विवेक नगर मामले में भी मकान मालिकों/अवैध रूप से बिजली का कमर्शियल लोड उपयोग करने वालों पर लापरवाही का केस दर्ज किया।

8. मध्य प्रदेश: देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट

 

स्थान और कारण: आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित देवास जिले के टोंक कलां क्षेत्र में एक लाइसेंस प्राप्त पटाखा निर्माण इकाई में भीषण धमाका हुआ। लगभग 28-30 मजदूर कमरे के अंदर बारूद (गनपाउडर) मिक्स कर रहे थे, तभी अत्यधिक गर्मी और रसायनों के घर्षण से ब्लास्ट हो गया। हादसे के वक्त 3 की मौके पर मौत हुई थी, बाद में गंभीर रूप से झुलसे अन्य मजदूरों ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा 25 से अधिक घायल हुए। धमाका इतना जोरदार था कि शवों के चीथड़े दूर सड़क पर जा गिरे।

क्या कार्रवाई हुई: मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले को देश की सुरक्षा और गंभीर लापरवाही से जोड़ते हुए फैक्ट्री के मालिक और डायरेक्टर अनिल मालवीय को गिरफ्तार किया। उस पर बेहद कड़ा कानून राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (रासुका) लगाया गया और उसका लाइसेंस तुरंत निलंबित कर दिया गया। केंद्र सरकार की पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ), फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम को जांच सौंपी।

9. बिहार: मुजफ्फरपुर आईसीयू अग्निकांड

 

स्थान और कारण: उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में यह भीषण आग लगी। इसमें पांच लोगों की मौत हुई। कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए या धुएं के कारण बीमार हो गए। बताया गया कि आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू वॉर्ड में लगी। प्राथमिक जांच के मुताबिक, आईसीयू में लगे एसी और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की हैवी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग भड़की।

आग लगने के बाद पूरे वार्ड में तेजी से गाढ़ा काला धुआं फैल गया। चूंकि मरने वाले मरीज गंभीर हालत में और बेड पर थे, वे खुद उठकर भागने में असमर्थ थे। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। जांच में सामने आया कि आपातकालीन स्थिति में अस्पताल के आंतरिक सुरक्षा अलार्म और फायर फाइटिंग सिस्टम ने काम नहीं किया। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इमारत में कोई रैंप या बाहरी आपातकालीन निकास (फायर एस्केप) नहीं बना था। राज्य सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और पीड़ितों के परिवारों के लिए चार लाख रुपये के मुआवजे

क्या कार्रवाई हुई: बिहार सरकार ने घटना के तुरंत बाद मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन (ब्रह्मपुरा) में एफआईआर दर्ज की गई। अस्पताल के संचालन को जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया और सरकार ने चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की।