31 दिसंबर 2018…’खूनी जश्न’ की वो रात और एक महिला डॉक्टर की मौत, अब बिहार के बाहुबली विधायक जाएंगे जेल, जानिए पूरी कहानी

क्राइम

BJP MLA Raju Singh Convicted: साल 2018 की वो आखिरी रात, जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत में झूम रही थी, तब दिल्ली के एक आलीशान फार्महाउस में रसूख, शराब और बारूद का एक ऐसा जानलेवा कॉकटेल तैयार हो रहा था जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को जीवन भर का मातम दे दिया. बिहार के मुजफ्फरपुर की साहिबगंज सीट से रसूखदार बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की पिस्तौल से नए साल की पार्टी में निकली एक अंधाधुंध फायरिंग ने वहां मौजूद महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में सुराख कर दिया था. रसूख के नशे में की गई उसी ‘हर्ष फायरिंग’ का इंसाफ करीब साढ़े सात साल बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से आया है. आइए जानते हैं क्या था यह पूरा कांड?

पटना/नई दिल्ली.
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू कुमार सिंह की मुश्किलें कानून के शिकंजे में पूरी तरह बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी करार दिया है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने फैसला सुनाते ही विधायक को तुरंत न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश जारी कर दिया. अदालत अब आगामी 9 जून को विधायक की सजा की अवधि पर अंतिम बहस सुनेगी. हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सबूत मिटाने समेत सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है.

वो खौफनाक रात… जब पार्टी के बीच अचानक चलीं गोलियां

इस पूरे हत्याकांड की वास्तविक कहानी 31 दिसंबर 2018 की रात दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके फतेहपुर बेरी स्थित मांडंडी फार्महाउस में शुरू होती है. यह फार्महाउस किसी और का नहीं बल्कि खुद राजू कुमार सिंह के परिवार का था. नए साल के इस जश्न में दिल्ली के कई रसूखदार लोग और नामचीन हस्तियां शामिल थीं, जिनमें प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और दिल्ली की रहने वाली डॉ. अर्चना गुप्ता भी अपने पति और बच्चों के साथ मौजूद थीं. रात के करीब 12 बजने वाले थे, हर तरफ संगीत गूंज रहा था. तभी आधी रात को काउंटडाउन शुरू होते ही तत्कालीन विधायक (उस वक्त वे वीआईपी पार्टी में थे) राजू कुमार सिंह ने अपने रसूख का प्रदर्शन करने के लिए अपनी लाइसेंसी पिस्तौल और राइफल से हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग (हर्ष फायरिंग) शुरू कर दी.

चीख-पुकार और अस्पताल में डॉक्टर की दर्दनाक मौत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवा में की गई कई राउंड फायरिंग के दौरान ही अचानक एक गोली सीधे वहां खड़ी डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में जा धंसी. गोली लगते ही डॉ. अर्चना खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ीं. जश्न का माहौल चंद सेकंड में चीख-पुकार और सन्नाटे में बदल गया. गंभीर रूप से घायल डॉक्टर को तुरंत पास के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. सिर में गहरी चोट और भारी ब्लीडिंग होने के कारण वे कोमा में चली गईं और घटना के ठीक एक हफ्ते बाद इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और वीआईपी कल्चर के तहत होने वाली फायरिंग पर बड़े सवाल खड़े किए थे.
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न्यू ईयर पार्टी में चली गोली, डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत, अब दोषी करार दिए गए BJP विधायक राजू सिंह.

 

कुशीनगर से गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजे का सच

घटना को अंजाम देने के बाद विधायक राजू सिंह और उनका परिवार दिल्ली पुलिस के डर से रातों-रात फार्महाउस छोड़कर फरार हो गया था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब उनका पीछा किया, तो घटना के दो दिन बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वे बिहार भागने की फिराक में थे. पुलिस को उनके पास से दो प्रतिबंधित अत्याधुनिक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे. दिल्ली पुलिस ने फतेहपुर बेरी थाने में हत्या के प्रयास (जो बाद में हत्या की धारा में बदला) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था.

कानून की नजर में रसूखदारों के गुनाह

सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने पाया कि राजू सिंह को एक जनप्रतिनिधि होने के नाते अच्छी तरह पता था कि भीड़भाड़ वाली जगह पर गोली चलाने से किसी की जान जा सकती है. इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें आर्म्स एक्ट की धारा 304 भाग-2 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी माना है, जिसमें अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. अब 9 जून को आने वाला कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि कानून की नजर में रसूखदारों के गुनाह की सजा क्या होती है.

परिवार का दर्द और रसूखदारों को लेकर सवाल

अर्चना गुप्ता आर्किटेक्ट थीं और खास बात यह कि परिवार ने उनके अंगदान का फैसला लिया था. पति विकास गुप्ता ने पूरे मामले में न्याय की लड़ाई लड़ी. घटना के समय राजू सिंह नशे में थे, यही कोर्ट का भी निष्कर्ष रहा. यह मामला हर्ष फायरिंग की खतरनाक परंपरा और जिम्मेदारीहीन व्यवहार का उदाहरण बन गया. राजनीतिक प्रभाव और क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों द्वारा हथियारों के दुरुपयोग पर भी सवाल उठे. वहीं, राजू सिंह अभी भी बिहार विधानसभा में सक्रिय हैं. इस दोषसिद्धि के बाद उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर असर पड़ सकता है.