अमेरिका द्वारा की जा रही बमबारी और डोनाल्ड ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाली आक्रामक नीति से बौखलाए ईरान ने शनिवार को एक आत्मघाती कदम उठाते हुए अमेरिकी सहयोगियों- बहरीन और कुवैत पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागकर पूरे पश्चिम एशिया में महायुद्ध का नया बवाल शुरू कर दिया है. दरअसल, अमेरिका इन खाड़ी देशों के सैन्य ठिकानों और एयरबेसेस का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले करवा रहा था, जिसके जवाब में ईरान ने सीधे अमेरिका से उलझने के बजाय उसकी दुखती रग यानी बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, और कुवैत पर सीधा मिसाइल अटैक कर खाड़ी के राजाओं को दहला दिया है.
तेहरान: शांति वार्ता के बीच ईरान का गुस्सा आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है. एक तरफ हथियार डालने की तैयारी चल रही है, दूसरी तरफ ईरान उन देशों में तबाही मचाने पर तुला है, जहां पर ट्रंप की परझाई तक पड़ रही है. अमेरिका दोबारा हमलों से बौखलाए ईरान ने शनिवार को एक ऐसा आत्मघाती कदम उठाया है, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र को दहला दिया है. ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों बहरीन और कुवैत पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दी हैं. इस अचानक हुए मिसाइल हमले के बाद खाड़ी के राजाओं और वहां के राजशाहियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
इस पूरे घमासान के पीछे सिर्फ आज की मिसाइलें नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप की वो खतरनाक परछाई भी है, जो इस पूरे इलाके के लिए मनहूस साबित हो रही है. ट्रंप की नीतियों और अमेरिकी तेवरों ने पश्चिम एशिया में एक बिल्कुल अलग ही लेवल की जंग छेड़ दी है, जहां अब कोई भी देश सुरक्षित नहीं बचा है.
अमेरिका के एक्शन पर ईरान का डेडली रिएक्शन
दरअसल, अमेरिका कुछ खाड़ी देशों को दोस्त-दोस्त बोलकर उनके एयरबेसेस से ईरान पर अटैक करवा रहा है. ट्रंप ने सोचा था कि वो ईरान को घुटनों पर ला देंगे, लेकिन ईरान ने इस बार सीधे अमेरिका के सामने मोर्चा खोलने के बजाय उसके सबसे करीबी और रणनीतिक तौर पर अहम पड़ोसियों को अपना निशाना बना लिया, जिससे की इन देशों में इतना खौफ बैठ जाए कि वो अमेरिका को अपनी जमीन देने से साफ इनकार कर दे.
शनिवार की सुबह जैसे ही ईरान की तरफ से मिसाइलें दागी गईं, बहरीन और कुवैत की सरजमीं थर्रा उठी. ये दोनों ही छोटे देश खाड़ी में अमेरिकी सेना के बहुत बड़े गढ़ माने जाते हैं. बहरीन में जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, वहीं कुवैत में हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. ईरान ने इन दोनों देशों पर मिसाइलें दागकर सीधे अमेरिका की दुखती रग पर हाथ रख दिया है. इस मिसाइल हमले के बाद बहरीन और कुवैत में इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं और सायरन की आवाज से पूरा आसमान गूंज उठा है.
ट्रंप की परछाई बनी मनहूस
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप की वो नीतियां हैं, जिनकी परछाई आज भी इस पूरे इलाके को बर्बाद कर रही है. शांति वार्ता के बीच ट्रंप, ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाली रणनीति अपना रहे हैं. उन्हें लगता है कि ईरान इतना दबाव में आ जाएगा कि उनकी सारी शर्तें मानने पर मजबूर हो जाएगा. हालांकि, दांव उल्टा ही पड़ गया.
पश्चिम एशिया में अब कोई न्यूट्रल नहीं!
ये हमला इस बात का साफ इशारा है कि पश्चिम एशिया में अब एक बिल्कुल अलग ही तरह की जंग शुरू हो चुकी है. पहले ये लड़ाई सिर्फ अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों जैसे हिजबुल्लाह और हुती के बीच मानी जाती थी. बहरीन और कुवैत जैसे देश खुद को इस लफड़े से दूर रखते थे लेकिन अब ईरान ने रणनीति बदल दी है. उसका सीधा गणित है- ‘अगर तुम हमारे घर पर बम गिराओगे, तो हम तुम्हारे उन पड़ोसियों को मारेंगे जो अमेरिका को अपने यहां पैर पसारने की जगह देते हैं’.
