नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले ने साफ कर दिया है कि जब तक परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के भीतर बैठे विभीषणों पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक सुरक्षा के सारे दावे खोखले रहेंगे। असली प्रश्नपत्र का मिलान आरोपियों की सीक्रेट क्लास के नोट्स और लातूर के मॉक टेस्ट से होना इस पूरे सिंडिकेट के पुख्ता सबूत हैं। आधिकारिक पहुंच रखने वाले एनटीए के अंदरूनी एक्सपर्ट्स की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई की जांच इस पूरे रैकेट के देशव्यापी नेटवर्क और इसके पुराने इतिहास को खंगालने पर टिकी है।
नई दिल्ली
देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।
मास्टरमाइंड के पास था प्रश्नपत्रों का एक्सेस
सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी। मनीषा पुणे की एक सीनियर बॉटनी लेक्चरर हैं और उन्हें इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उन्हें एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक हैसियत की वजह से प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। वहीं, पुणे से गिरफ्तार लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी भी लंबे समय से एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इन दोनों ने मिलकर सिस्टम के इसी भरोसे का फायदा उठाया और पेपर को लीक कर दिया।
सीक्रेट क्लासरूम और रटाए गए जवाब
सीबीआई के अनुसार, यह खेल अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही शुरू हो चुका था। कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर ऐसे छात्रों को जोड़ना शुरू किया जो इसके लिए मोटी रकम दे सकें। अब आप सोच रहे होंगे यह दूसरी मनीषा कौन है? मनीषा वाघमारे पुणे में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं। इसके बाद पुणे में कुलकर्णी के घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक ‘विशेष कोचिंग क्लास’ शुरू हुई। यह कोई साधारण क्लास नहीं थी। यहां छात्रों को न तो कोई कॉन्सेप्ट समझाया जा रहा था और न ही कोई थ्योरी पढ़ाई जा रही थी। यहां सीधे नीट परीक्षा के सवाल, उनके विकल्प और सही जवाब बताए जा रहे थे। छात्र चुपचाप इन्हें अपनी कॉपियों में नोट कर रहे थे। जब सीबीआई ने इन छात्रों की नोटबुक्स जब्त कीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से ये सवाल हूबहू मैच कर रहे थे।
लातूर के एक मॉक टेस्ट से खुला पूरा राज
इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ महाराष्ट्र के लातूर में हुआ। वहां एक कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट में अचानक 42 ऐसे सवाल पूछ लिए गए, जो ठीक दो दिन बाद होने वाली नीट परीक्षा के असली पेपर में आने वाले थे। जब परीक्षा के दिन असली पेपर सामने आया, तो कुछ जागरूक अभिभावकों के कान खड़े हो गए। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की। मामले की गंभीरता और इसके अंतर-राज्यीय कनेक्शन को देखते हुए केस तुरंत सीबीआई को सौंप दिया गया।
आर्थिक स्थिति देखकर जाल में फंसाते थे आरोपी
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह एक बेहद संगठित सिंडिकेट था। यह नेटवर्क सेमिनार आयोजित करता था और ऐसे छात्रों को ढूंढता था जो पढ़ाई में कमजोर हों लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इस काम के लिए उन्होंने पुराने छात्रों, खासकर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं को अपना एजेंट बना रखा था। पिछले 24 घंटों में सीबीआई ने देशव्यापी छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं। अब तक जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से कुल नौ लोगों को दबोचा जा चुका है।
गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों की कुंडली
मनीषा गुरुनाथ मंधारे: पुणे की सीनियर बॉटनी लेक्चरर और एनटीए एक्सपर्ट, जिन्हें साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
प्रो. पीवी कुलकर्णी: लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर और मुख्य सूत्रधार, जिनकी प्रश्न पत्र पैनल तक पहुंच थी।
मनीषा वाघमारे: पुणे की ब्यूटी सैलून मालकिन, जो उम्मीदवारों को जुटाने और सीक्रेट क्लास मैनेज करने में सहयोगी थीं।
मांगीलाल बीवाल: जयपुर का निवासी, जिस पर लीक पेपर हासिल करने और उसे आगे बांटने का आरोप है।
विकास बीवाल: मांगीलाल का बेटा और मेडिकल छात्र, जिसने इस अवैध काम को अंजाम देने में मदद की।
दिनेश बीवाल: मांगीलाल का भाई, जो इस पूरे खेल के वित्तीय लेन-देन को संभाल रहा था।
यश यादव: गुरुग्राम का रहने वाला मुख्य बिचौलिया, जिसने लीक प्रश्न पत्र बीवाल परिवार तक पहुंचाया।
शुभम खैरनार: नासिक का निवासी, जिस पर सबसे पहले लीक या गेस प्रश्न पत्र को बाजार में फैलाने का शक है।
धनंजय लोखंडे: अहिल्यानगर का आयुर्वेद डॉक्टर, जिसे इस मामले में संलिप्तता के बाद हिरासत में लिया गया।
सीबीआई अब प्रो कुलकर्णी के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट का हाथ नीट 2024 के पेपर लीक और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से भी जुड़ा हो सकता है।
