‘केवल खिलवाड़ किया गया’, 4 साल की बच्ची से रेप-मर्डर मामले में सख्त सु्प्रीम कोर्ट, पुलिस आयुक्त की लगेगी क्लास

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में नाबालिक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. पुलिस और अस्पताल की लापरवाही देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश (यूपी) पुलिस और अस्पताल मैनेजमेंट को फटकार लगाई है. शीर्ष कोर्ट ने अस्पताल के रवैये को अत्यंत संवेदनशील और संस्थागत क्रूरता बताया है, साथ ही अगली सुनवाई में पुलिस आयुक्त को हाजिर होने का निर्देश दिया है.

 

 सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या मामले में लापरवाही बरतने के आरोप मे गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर और एसएचओ को सोमवार को अदालत में तलब किया है. पुलिस पर दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को कस्टडी में पैर मे गोली मारने का भी आरोप लगा है. गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई की कडी आलोचना की.

पुलिस कस्टडी में आरोपी के पैर में गोली लगने पर भी कोर्ट ने सवाल खडा किया. पुलिस ने कहा है कि आरोपी को लेकर जब घटना की जांच के लिए जा रहे थे, तब उसने एक पुलिसवाले की बंदूक छीनकर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने उसके पैरों में गोली मार दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की थ्योरी दिलचस्प है. जस्टिस जॉयमाला बागची ने पूछा कि कोई आरोपी पुलिस कस्टडी में रहते हुए, वह भी एक पुलिसवाले की बंदूक छीनकर, फायरिंग करने की कोशिश कैसे कर सकता है.

पुलिस कमिश्नर और एसएचओ होंगे हाजिर

कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई के दौरान पुलिस कमिश्नर और एसएचओ को आरोपों पर सफाई देने के लिए खुद कोर्ट में मौजूद रहने को कहा है. पुलिस पर यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर करने की कोशिश की है और पीड़ित के परिवार पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया.

पड़ोसी ने किया कुकर्म

जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मजदूर की चार वर्षीय बच्ची थी, जिसको 16 मार्च को उनके पड़ोस के एक शख्स चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था. काफी देर बाद तक भी जब बच्ची घर नहीं लौटी तो उसके पिता ने उसे ढूंढना शुरू किया. पिता ने जब बच्ची को पाया तो वो बेहोश पड़ी थी और खून से लथपथ थी. उस बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया था. बच्ची को तुरंत पास ही के दो प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उन्होंने बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया. अंत में बच्ची को एक सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.