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एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप पर गंभीर आरोप, फिर अचानक गायब हुए दस्तावेज, क्या छुपाया जा रहा है सच?

एपस्टीन फाइल से जुड़े नए दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं. इसमें डोनाल्ड ट्रंप का नाम सैकड़ों बार सामने आया है, लेकिन इनमें शामिल आरोप ज्यादातर FBI को मिली अप्रमाणित टिप्स पर आधारित हैं. न्याय विभाग ने ट्रंप से जुड़ी कुछ फाइलों को हटाया और वापस अपलोड किया, जिसे लेकर वह घिर गया है.

 

वॉशिंगटन
अमेरिका में यौन अपराधी और बदनाम फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक भूचाल खड़ा कर दिया है. अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को एपस्टीन मामले से जुड़े 30 लाख से अधिक दस्तावेज सार्वजनिक करने का ऐलान किया है. यह अब तक का सबसे बड़ा दस्तावेजी खुलासा माना जा रहा है, जिसने अमेरिका ही नहीं, ब्रिटेन तक की राजनीतिक और बिजनेस वर्ल्ड में हलचल मचा दी है. हालांकि ट्रंप से जुड़ी फाइलों को लेकर न्याय विभाग घिर गया. टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इनमें शामिल एक बेहद संवेदनशील फाइल कुछ ही घंटों में वेबसाइट से हटा दी गई और बाद में दोबारा अपलोड की गई. इस फाइल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े अप्रमाणित आरोपों का जिक्र था, जिसे लेकर सोशल मीडिया और राजनीति दोनों में हंगामा मच गया. अमेरिका के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जारी किए गए कुल दस्तावेजों में करीब 2,000 वीडियो और 1 लाख 80 हजार से ज्यादा तस्वीरें शामिल हैं. हालांकि इनमें से कई हिस्सों को गोपनीयता और कानूनी कारणों से ब्लैक किया गया है.

क्या हैं एपस्टीन फाइल्स?

न्याय विभाग के मुताबिक, कुल 60 लाख से ज्यादा पन्नों को संभावित रूप से प्रासंगिक माना गया था. इनमें FBI और न्याय विभाग के ईमेल, इंटरव्यू रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, तस्वीरें, वीडियो और जब्त किए गए डिजिटल डेटा शामिल हैं. जांच के बाद करीब 35 लाख पन्ने जारी किए गए हैं. इन दस्तावेजों में बड़ी मात्रा में अश्लील सामग्री भी है, जिसे एपस्टीन के निजी डिवाइस से जब्त किया गया था. कुछ फाइलें इसलिए रोकी गई हैं क्योंकि वे चल रही जांच, पीड़ितों की निजता और मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़ी हैं.

ट्रंप को लेकर घिरा न्याय विभाग

इन फाइल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सैकड़ों बार सामने आया है. हालांकि न्याय विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने साफ किया है कि इनमें शामिल कई आरोप अप्रमाणित हैं और इनका कोई कानूनी आधार नहीं पाया गया है. जिस दस्तावेज को अस्थायी रूप से हटाया गया, उसमें FBI की ओर से अगस्त 2025 में तैयार की गई एक सूची शामिल थी. यह लिस्ट FBI की नेशनल थ्रेट ऑपरेशंस सेंटर को मिली शिकायतों पर आधारित थी. इनमें डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोप दर्ज थे. सबसे गंभीर आरोप यह था कि करीब तीन दशक पहले न्यू जर्सी में एक 13 या 14 साल की लड़की को ट्रंप की ओर से यौन कृत्य के लिए मजबूर किया गया. यह दावा कथित पीड़िता की एक ‘अज्ञात महिला दोस्त’ ने किया था. दस्तावेजों में यह भी लिखा है कि इस जानकारी का कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया.
दस्तावेजों के मुताबिक, ये शिकायतें अलग-अलग समय पर दर्ज की गई थीं, जिनमें कुछ 35 साल पुरानी भी हैं. सबसे अहम बात यह है कि इनमें से किसी भी टिप के सत्यापन का कोई सबूत दस्तावेजों में मौजूद नहीं है. स्प्रेडशीट के साथ जुड़े एक ईमेल में लिखा गया था, ‘यह वह लिस्ट है जो मैंने व्हिटनी को NTOC से आए ट्रंप के आरोप लगाने वालों के नामों के साथ भेजी थी.’ माना जा रहा है कि यह ईमेल FBI के न्यूयॉर्क फील्ड ऑफिस से अगस्त 2025 में भेजा गया था.

FBI ने क्या किया?

रिकॉर्ड के मुताबिक, FBI ने इस शिकायत को वॉशिंगटन ऑफिस को भेजा था ताकि गवाह का इंटरव्यू लिया जा सके. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह इंटरव्यू हुआ भी या नहीं और उसका नतीजा क्या रहा. दस्तावेजों में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि FBI ने इन आरोपों को विश्वसनीय माना हो. अन्य आरोपों में कथित ‘ऑर्जी पार्टियों’ का भी जिक्र है, लेकिन इनमें आरोप लगाने वालों की पहचान, समय और सबूतों को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कई मामलों में FBI अधिकारी आरोप लगाने वालों से संपर्क तक नहीं कर पाए और एक मामले में व्यक्ति को ‘विश्वसनीय नहीं’ माना गया.

फाइल क्यों हटाई गई और फिर क्यों अपलोड हुई?

न्याय विभाग ने ब्रिटिश अखबार को बताया कि संबंधित दस्तावेज ‘वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक’ के कारण अस्थायी रूप से डाउन हो गया था और अब फिर से ऑनलाइन है. हालांकि, इस दौरान सोशल मीडिया पर आरोपों की काफी चर्चा हो चुकी थी. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों की समीक्षा में गलतियां हो सकती हैं और यदि किसी रेडैक्शन में चूक हुई है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा.

ट्रंप पर व्हाइट हाउस की क्या है सफाई?

न्याय विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कुछ दस्तावेजों में ट्रंप के खिलाफ ‘झूठे और सनसनीखेज’ दावे शामिल हैं, जो 2020 के चुनाव से ठीक पहले FBI को भेजे गए थे. बयान में कहा गया कि ये दावे पूरी तरह निराधार हैं और अगर इनमें जरा भी सच्चाई होती, तो इन्हें पहले ही ट्रंप के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा चुका होता.

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