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न्यूड फोटो भेजकर फंसाते फिर टपका देते, चीन में एक परिवार के 11 लोगों को फांसी, ऐसे ही कांड में फंसे थे 270 भारतीय

चीन में एक माफिया परिवार के 11 लोगों को फांसी पर लटका दिया गया है. ये माफिया गैंग एक रैकेट चलाता था जिसके लिए कर्मचारी भी स्कैम के जरिए भरे गए थे. दुनिया के अलग-अलग देशों से नौकरी का झांसा देकर लोग बुलाए जाते थे, फिर उनका पासपोर्ट कब्जे में लेकर उन्हें कैद कर लिया जाता था. फिर उन लोगों से जबरदस्ती लव रैकेट, क्रिप्टो लूट, हत्याएं, किडनैपिंग और साइबर क्राइम जैसे अपराध करवाए जाते थे. ऐसे नौकरी के झांसों में म्यांमार के माफियाओं ने सैकड़ों भारतीयों को फंसाया था.
बीजिंग
चीन में एक परिवार के 11 लोगों को फांसी की सजा दी गई है. ये सजा म्यांमार की एक कुख्यात माफिया फैमिली को मिली है, जो रोमांस का रैकेट चलाते थे. ये रैकेट वेश्यावृत्ती से लेकर ऑनलाइन ठगी और हत्या जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देता था. ये गैंग लोगों को इंटरनेट के जरिए फर्जी प्रेम कहानियों में फंसा था और क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी को अंजाम देता था. सिर्फ यही नहीं माफिया गैंग, ये रैकेट चलाने के लिए लोगों को नौकरी का झांसा बुलाता था फिर कैद कर लेता था. इन्हीं लोगों को रैकेट का कर्मचारी बनाया जाता था. म्यांमार के एक ऐसे ही रैकेट में 270 से भी ज्यादा भारतीय फंस चुके हैं.
चीन ने फांसी पर चढ़ाया मिंग माफिया परिवार
चीन ने म्यांमार के एक कुख्यात माफिया मिंग के परिवार के 11 सदस्यों को फांसी दी है, जो फर्जी ऑनलाइन प्रेम कहानियों के जरिए पीड़ितों को ठगने के लिए बदनाम था. मिंग परिवार के सदस्यों को सितंबर में पूर्वी चीनी शहर वेनझोउ की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, और उसी अदालत ने गुरुवार को फांसी को अंजाम दिया.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, उन्हें ‘हत्या, मारपीट, गैरकानूनी हिरासत, धोखाधड़ी और कैसीनो’ जैसे अपराधों के लिए फांसी दी गई. स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस गैंग ने कम से कम 14 चीनी नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया था और अनगिनत लोगों को अपाहिज बना दिया.
कैसे चलता था ये ‘खूनी’ व्यापार?
- यह सिर्फ एक स्कैम नहीं, बल्कि इंसानी गुलामी का अड्डा था. म्यांमार के लाउकैंग इलाके में ये लोग ‘लव स्कैम’ और ‘क्रिप्टो लूट’ का मायाजाल बुनते थे.
- हनी ट्रैप: इंटरनेट पर मासूम लोगों को प्यार के जाल में फंसाया जाता था.
- क्रिप्टो लूट: फर्जी निवेश के जरिए उनकी जिंदगी भर की कमाई हड़प ली जाती थी.
- टॉर्चर सेंटर: जो लोग इनके लिए काम करने से मना करते, उन्हें बंधक बनाकर बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था.
इस गैंग का सरगना चेन झी लंदन में आलीशान जिंदगी जी रहा था. लंदन के पॉश इलाके ‘एवेन्यू रोड’ पर उसकी एक आलीशान हवेली भी थी, जिसकी कीमत 120 करोड़ रुपए बताई जाती है. इसके अलावा फेंचर्च स्ट्रीट पर उसके नाम पर 100 मिलियन यूरो की ऑफिस बिल्डिंग्स और दर्जनों फ्लैट्स भी हैं. ब्रिटिश सरकार ने इस माफिया की सभी संपत्तियों को जब्त कर लिया है ताकि ‘गंदा पैसा’ सड़कों से हटाया जा सके.
भारतीयों को कैसे फंसाते हैं म्यांमार के माफिया?
जिस तरह की ‘डिजिटल गुलामी’ का रैकेट मिंग परिवार चलाता था, म्यांमार के वैसे ही रैकेट में 70 भारतीय फंस चुके हैं. भारत में होने वाले ज्यादातर ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ स्कैम्स के तार इन्हीं म्यांमार और कंबोडिया के केंद्रों से जुड़े हैं.
म्यांमार के इन ‘स्कैम सेंटर’ में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने बड़े स्तर पर अभियान चलाए हैं.
- नवंबर 2025 का मिशन: हाल ही में (6 नवंबर 2025), भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों ने 270 भारतीयों को थाईलैंड के रास्ते वापस लाया. ये लोग म्यांमार के ‘KK Park’ जैसे कुख्यात केंद्रों से जान बचाकर भागे थे.
- मार्च 2025: इससे पहले 549 भारतीयों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा से रेस्क्यू किया गया था.
हजारों भारतीयों को ‘आईटी जॉब’ के नाम पर थाईलैंड बुलाया जाता है और फिर उन्हें किडनैप करके म्यांमार के इन काल कोठरियों में धकेल दिया जाता है.
वहां पहुंचने के बाद इन युवाओं के पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें ‘पिग बुचरिंग’ स्कैम्स, रोमांस और क्रिप्टो का लालच देकर लूट स्कैम करने के लिए मजबूर किया जाता है. जो मना करते हैं, उन्हें बिजली के झटके दिए जाते हैं.
मिंग परिवार जैसे माफिया केवल चीनी नागरिकों को ही नहीं, बल्कि अब अंग्रेजी और हिंदी बोलने वाले भारतीयों को भी निशाना बना रहे हैं ताकि वे भारतीय बाजार से करोड़ों रुपये लूट सकें.




