उत्तरप्रदेश
यूपी में कितना बड़ा सिटी मजिस्ट्रेट का पद, कब होते हैं सस्पेंड, हटाए जाने पर नुकसान, क्या नहीं मिलता

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इस्तीफा दे दिया. लेकिन राज्य सरकार ने इसे मंजूर किए बगैर उन्हें सस्पेंड कर दिया. अब आगे उनका क्या होगा. अगर सरकार ने उन्हें जांच के बाद हटा दिया तो वो किस सुविधाओं और लाभ से वंचित रह जाएंगे, जो उन्हें इस्तीफा स्वीकार किए जाने पर मिलता.
रेली के सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक अलंकार ने नाखुश होकर राज्य सरकार की आलोचना करते हुए जब इस्तीफा दे दिया तो राज्य सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. वह पीसीएस अफसर हैं. सिटी मजिस्ट्रेट किसी भी जिले के प्रशासन में महत्वपूर्ण अधिकारी होता है. जो खास पॉवर्स से लैस भी होता है. आखिर किस हालत में सरकार प्रोवेंशियल सिविल सर्विसेस के अधिकारी को निलंबित करती थी. उसके बाद की प्रक्रिया क्या होती है.
वैसे कई बार लोगों को लगता है कि सिटी मजिस्ट्रेट शहर का “दूसरा सबसे बड़ा अधिकारी” होता है लेकिन ऐसा नहीं है. पूरे जिले का मुखिया जिलाधिकारी यानि डीएम होता है. उसके बाद जिले में दूसरे नंबर पर आमतौर पर एडीएम यानि अपर जिलाधिकारी आते हैं. एक जिले में कई एडीएम हो सकते हैं. सिटी मजिस्ट्रेट का पद विशेष रूप से शहरी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होता है.
उसका कार्यक्षेत्र केवल नगर निगम सीमा तक सीमित होता है. प्रशासनिक प्रोटोकॉल में सिटी मजिस्ट्रेट का पद एडीएम से नीचे और एसडीएम के समकक्ष या थोड़ा ऊपर माना जाता है. बेशक वो प्रोटोकॉल में दूसरे नंबर पर नहीं होता लेकिन शहर के भीतर शांति व्यवस्था, अतिक्रमण हटाना और त्योहारों के दौरान जमीन पर सबसे ज्यादा पॉवर और सक्रियता इन्हीं की दिखती है.
किसी भी पीसीएस अफसर को निलंबित करना एक गंभीर प्रशासनिक प्रक्रिया है. ये मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत की जाती है.
किन स्थितियों में सस्पेंशन
गंभीर कदाचार – कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही या आदेशों की अवहेलना.
भ्रष्टाचार – रिश्वत लेने के ठोस सबूत या आय से अधिक संपत्ति का मामला.
गरिमा के खिलाफ काम – किसी ऐसे अपराध में शामिल होना जो समाज और पद की गरिमा के खिलाफ हो.
हिरासत – यदि अधिकारी को किसी आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक जेल में रखा जाता है, तो उसे ‘डीम्ड सस्पेंशन’ माना जाता है.
जांच को प्रभावित करना – यदि सरकार को लगता है कि पद पर बने रहकर अधिकारी अपने खिलाफ चल रही किसी जांच के सबूतों या गवाहों को प्रभावित कर सकता है.
भ्रष्टाचार – रिश्वत लेने के ठोस सबूत या आय से अधिक संपत्ति का मामला.
गरिमा के खिलाफ काम – किसी ऐसे अपराध में शामिल होना जो समाज और पद की गरिमा के खिलाफ हो.
हिरासत – यदि अधिकारी को किसी आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक जेल में रखा जाता है, तो उसे ‘डीम्ड सस्पेंशन’ माना जाता है.
जांच को प्रभावित करना – यदि सरकार को लगता है कि पद पर बने रहकर अधिकारी अपने खिलाफ चल रही किसी जांच के सबूतों या गवाहों को प्रभावित कर सकता है.
निलंबन के बाद की प्रक्रिया
निलंबन नौकरी से बर्खास्तगी नहीं है, बल्कि जांच पूरी होने तक काम से अलग करना है. ये प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है.
– पीसीएस अधिकारी राज्य सरकार के अधीन होते हैं, इसलिए निलंबन का आदेश राज्य सरकार के नियुक्ति विभाग या मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी होता है.
– सस्पेंशन के दौरान अधिकारी को वेतन नहीं मिलता, लेकिन जीवन यापन के लिए आधे वेतन के बराबर ‘निर्वाह भत्ता’ दिया जाता है.
– निलंबित अधिकारी को किसी अन्य कार्यालय जैसे कमिश्नर ऑफिस या राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया जाता है. वे बिना अनुमति शहर नहीं छोड़ सकते.
– निलंबन के बाद सरकार को एक निश्चित समय के भीतर अधिकारी को चार्जशीट देनी होती है, जिसमें उन पर लगे आरोपों का विवरण होता है.
– एक सीनियर अफसर जैसे कमिश्नर या सचिव स्तर के अधिकारी को ‘जांच अधिकारी’ नियुक्त किया जाता है. वे सभी पक्षों को सुनकर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हैं.
– सस्पेंशन के दौरान अधिकारी को वेतन नहीं मिलता, लेकिन जीवन यापन के लिए आधे वेतन के बराबर ‘निर्वाह भत्ता’ दिया जाता है.
– निलंबित अधिकारी को किसी अन्य कार्यालय जैसे कमिश्नर ऑफिस या राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया जाता है. वे बिना अनुमति शहर नहीं छोड़ सकते.
– निलंबन के बाद सरकार को एक निश्चित समय के भीतर अधिकारी को चार्जशीट देनी होती है, जिसमें उन पर लगे आरोपों का विवरण होता है.
– एक सीनियर अफसर जैसे कमिश्नर या सचिव स्तर के अधिकारी को ‘जांच अधिकारी’ नियुक्त किया जाता है. वे सभी पक्षों को सुनकर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हैं.
जांच के बाद क्या होता है
जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार तीन फैसले ले सकती है.
बहाली – यदि आरोप गलत पाए जाते हैं, तो अधिकारी को ससम्मान बहाल कर दिया जाता है. पिछला पूरा वेतन दिया जाता है.
हल्की पेनाल्टी – जैसे निंदा प्रविष्टि देना या प्रमोशन रोकना.
बड़ी पेनाल्टी – सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति या बर्खास्तगी
बहाली – यदि आरोप गलत पाए जाते हैं, तो अधिकारी को ससम्मान बहाल कर दिया जाता है. पिछला पूरा वेतन दिया जाता है.
हल्की पेनाल्टी – जैसे निंदा प्रविष्टि देना या प्रमोशन रोकना.
बड़ी पेनाल्टी – सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति या बर्खास्तगी
चूंकि सिटी मजिस्ट्रेट एक राजपत्रित अधिकारी होते हैं, इसलिए उनका निलंबन जिलाधिकारी नहीं कर सकते. DM केवल शासन को निलंबन की सिफारिश भेज सकते हैं.
इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ने और हटाने में क्या अंतर
चूंकि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक अलंकार ने इस्तीफा दिया था लेकिन सरकार ने उसे नहीं मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया, अब अगर उन्हें जांच के बाद नौकरी से हटा दिया जाता है तो क्या इस तरह नौकरी से हटाए जाने पर क्या नुकसान होगा. इस्तीफा और नौकरी से हटाया जाना दो एकदम अलग स्थितियां हैं. एक ‘सम्मानजनक विदाई’ है, तो दूसरी ‘दंडात्मक कार्रवाई’.
इस्तीफा देकर हटना – जब कोई अधिकारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ता है और सरकार उसे स्वीकार कर लेती है, तो ये स्वैच्छिक और सम्मानजनक होता है. इस्तीफा देने के बाद व्यक्ति भविष्य में दूसरी सरकारी नौकरी के लिए पात्र रहता है. अधिकारी की छवि पर कोई दाग नहीं लगता.
निलंबन के बाद नौकरी से हटाना – गंभीर आरोपों की जांच के बाद जब सरकार अधिकारी को सेवा से बाहर कर देती है. इसमें एक कंडीशन में भविष्य में दूसरी सरकारी नौकरी मिलने की संभावना बची रहती है. हालांकि व्यवहार में यह बहुत मुश्किल होता है. लेकिन अगर बर्खास्तगी के जरिए नौकरी जाए तो व्यक्ति भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो जाता है.
किन सुविधाओं का नुकसान
जब किसी अधिकारी को बर्खास्त या हटाया तो उसे कई सुविधाओं से हाथ धोना पड़ता है
1. पेंशन – सबसे बड़ा नुकसान पेंशन का होता है. बर्खास्त अधिकारी पेंशन का हकदार नहीं होता. हालांकि कुछ मामलों में मानवीय आधार पर ‘दयालु भत्ता’ दिया जा सकता है, जो सरकार के विवेक पर निर्भर है.
2. ग्रेच्युटी – नौकरी से हटाए गए अधिकारी की ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है या पूरी तरह जब्त की जा सकती है. इस्तीफे के मामले में यदि सेवा की न्यूनतम अवधि पूरी हो चुकी है, तो ग्रेच्युटी मिलती है.
3.लीव एनकैशमेंट – इस्तीफे में बची हुई छुट्टियों का पैसा मिलता है, लेकिन बर्खास्तगी के मामले में अक्सर इसे भी रोक दिया जाता है.
4.भविष्य की सरकारी सुविधाएं – बर्खास्त अधिकारी को भविष्य में किसी भी सरकारी पद, चुनाव लड़ने या सरकारी पैनल में शामिल होने से रोका जा सकता है.
5.सम्मान और लाभ – सेवा के दौरान मिलने वाले पदक, सरकारी आवास और अन्य भत्ते तुरंत छीन लिए जाते हैं.
1. पेंशन – सबसे बड़ा नुकसान पेंशन का होता है. बर्खास्त अधिकारी पेंशन का हकदार नहीं होता. हालांकि कुछ मामलों में मानवीय आधार पर ‘दयालु भत्ता’ दिया जा सकता है, जो सरकार के विवेक पर निर्भर है.
2. ग्रेच्युटी – नौकरी से हटाए गए अधिकारी की ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है या पूरी तरह जब्त की जा सकती है. इस्तीफे के मामले में यदि सेवा की न्यूनतम अवधि पूरी हो चुकी है, तो ग्रेच्युटी मिलती है.
3.लीव एनकैशमेंट – इस्तीफे में बची हुई छुट्टियों का पैसा मिलता है, लेकिन बर्खास्तगी के मामले में अक्सर इसे भी रोक दिया जाता है.
4.भविष्य की सरकारी सुविधाएं – बर्खास्त अधिकारी को भविष्य में किसी भी सरकारी पद, चुनाव लड़ने या सरकारी पैनल में शामिल होने से रोका जा सकता है.
5.सम्मान और लाभ – सेवा के दौरान मिलने वाले पदक, सरकारी आवास और अन्य भत्ते तुरंत छीन लिए जाते हैं.




