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सिर्फ ताकतवर लोग ही अफगानिस्तान से निकल पाए, आज भी हजारों मौत के मुंह में, US जब भागा तो कैसे थे हालात?

व्हाइट हाउस से कुछ ब्लॉक दूर अफगान मूल के रहमानुल्लाह लकानवाल ने दो नेशनल गार्ड जवानो पर घात लगाकर फायरिंग की. 20 साल की सारा बेकस्ट्रॉम की मौत हो गई जबकि एंड्र्यू वोल्फ गंभीर हालत में है. ट्रंप ने हमले को बाइडेन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना है कि अमेरिका बिना किसी स्क्रूटनी के अफगानों को ले आया. ये गंभीर मामला है. आइए जानें अमेरिका के निकलने के दौरान हालात कैसे थे.
शुक्रवार को व्हाइट हाउस से महज कुछ ब्लॉक दूर, वेस्ट वर्जीनिया नेशनल गार्ड की दो जवान ड्यूटी पर थे. 20 साल की सारा बेकस्ट्रॉम और 24 साल के एंड्र्यू वोल्फ पर अचानक गोलीबारी हुई. हमलावर ने घात लगाकर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की. सारा की इलाज के दौरान मौत हो गई, वहीं एंड्र्यू अब भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. हमलावर की पहचान राहमनुल्लाह लकानवाल के रूप में हुई, जो 29 साल का अफगानी है. कभी वह CIA की कंधार स्ट्राइक फोर्स में अमेरिकी फौजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तालिबान से लड़ता था. 2021 में ऑपरेशन एलाइज वेलकम के तहत अमेरिका लाया गया. लगभग 77,000 अफगानी मूल के लोग अमेरिका पहुंचे.
हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत बयान दिया कि ‘यह बाइडन की सबसे बड़ी नाकामी का नतीजा है. बिना ठीक से जांच-पड़ताल के हजारों लोगों को देश में घुसने दिया गया. अब अमेरिकी सैनिकों का खून बह रहा है. हम हर अफगानी केस की दोबारा जांच करेंगे.’ ट्रंप प्रशासन ने तुरंत सभी अफगानी इमिग्रेशन एप्लीकेशन रोक दीं. उन्होंने अफगानी लोगों की प्लेन में भरभरकर आने की तस्वीरें भी दिखाई और कहा कि बाइडन इस तरह लोगों को बड़ी संख्या में लाए. लेकिन अमेरिका जिस तरीके से अफगानिस्तान से निकला था, उसे लेकर आज भी सवाल उठता है. हालांकि जिन अफगानी लोगों को अमेरिका आने पर ट्रंप सवाल उठा रहे हैं, दरअसल वह अमेरिका की जिम्मेदारी थे. क्योंकि इन लोगों ने अपनी जान दांव पर लगाकर अमेरिका की मदद क थी. वहीं अफगानिस्तान से भी निकल पाना आसान नहीं था.

अमेरिका जब अफगानिस्तान से निकल रहा था तब के हालात.
अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने के दौरान कैसे थे हालात?
15 अगस्त 2021 को तालिबान काबुल में घुस आया. अशरफ गनी हेलिकॉप्टर में डॉलर भरे बैग लेकर भाग गए. अफगान आर्मी ने हथियार डाल दिए. और काबुल एयरपोर्ट पर नरक जैसे हालात थे. लाखों लोग जान बचाकर भागना चाहते थे. लेकिन प्लेन में सिर्फ दो तरह के लोग चढ़ पाए.

पहले वे जिनके पास ‘शरीर की ताकत’ थी. जो रात-दिन एयरपोर्ट के बाहर खड़े रहे. जिन्होंने कटीले तारों को हाथों से खींचा, दीवार फांदी, तालिबान की गोलियां झेलीं, भीड़ को रौंदा. मां अपने नवजात बच्चों को कटीले तारों के ऊपर फेंक रही थीं. कई बच्चे अमेरिकी मरीन्स के हाथों में पहुंचे, कई हमेशा के लिए गुम हो गए.

दूसरे वे जिनके पास ‘पहुंच की ताकत’ थी. बड़े अफसर, जनरल, मंत्री, व्यापारी. जिनके पास अमेरिकी अधिकारियों के डायरेक्ट नंबर थे. जो पहले से दुबई, तुर्की या अमेरिका में संपत्ति रखते थे. वे चुपचाप, आराम से निकल गए.

C17 विमान मे जाते अफगानी लोग.
क्या अमेरिका की मदद करने वाले पीछे रह गए?
अमेरिका सभी को अफगानिस्तान से नहीं निकाल पाया. बहुत से ऐसे अनुवादक जो अमेरिकी सैनिकों की जान बचाते थे, महिला जजें जो तालिबान को चुनौती देती थीं, हजारा एक्टिविस्ट, पूर्व कमांडो, पत्रकार, लड़कियां जो स्कूल जाना चाहती थीं वे सब दीवार के बाहर ही रह गए. हालांकि हजारों की संख्या में अपने मददगार लोगों को निकाला.

रेसक्यू के दौरान हुआ हमला
26 अगस्त 2021 को इस्लामिक स्टेट का आत्मघाती हमला हुआ. एयरपोर्ट के गेट पर धमाके में 170 अफगानी और 13 अमेरिकी मरीन्स मारे गए. उस दिन का वीडियो आज भी देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जिसमें लाशें बिखरी हुईं, खून से लथपथ बच्चे, और चीखें सुनाई देती हैं.

अमेरिका ने अफगानिस्तान से कितने लोगों को निकाला?
तालिबान के आने के बाद लोग हर हाल में भागना चाहते थे. 16 अगस्त को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया. अमेरिका का C-17 प्लेन टेकऑफ कर रहा था. सैकड़ों अफगानी उसके पहियों और पंखों से लटके हुए थे. जैसे ही प्लेन ऊपर उठा, लोग आसमान से पत्थरों की तरह नीचे गिरने लगे. 14 से 30 अगस्त तक 1,24,000 लोग निकाले गए. सुनने में बड़ी संख्या लगती है. लेकिन ये वे लोग थे जो किसी भी तरह अंदर घुस गए. जिन्हें सच में बचाना था, उनमें से ज्यादातर बाहर ही रह गए.

मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू वह आखिरी अमेरिकी सैनिक हैं जो अफगानिस्तान से निकले.
अफगानिस्तान में कितने लोग फंस गए?
आज भी एक लाख से ज्यादा अमेरिकी मददगार लोग पीछे रह गए हैं. No One Left Behind ने 242 ऐसे मामले दर्ज किए हैं जहां तालिबान ने अमेरिका के पूर्व सहयोगियों को मार डाला या गायब कर दिया. सैकड़ों पूर्व अफगान कमांडो आज भी तालिबान की जेलों में हैं या पाकिस्तान-ईरान में शरणार्थी कैंपों में सड़ रहे हैं. और अब रहमानुल्लाह लकानवाल जैसे लोग, जो खुद CIA के साथ लड़ चुके थे, अमेरिका में ही बंदूक उठा रहे हैं.




