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बुजुर्ग महिला को ‘सुप्रीम’ राहत, शीर्ष अदालत ने की इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना; FIR पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 71 साल की बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत दी और इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमानत अस्वीकार करने के फैसले की आलोचना की। कोर्ट ने वकील दादूराम शुक्ला के खिलाफ 10,000 रुपये के जमानती वारंट जारी किए और महिला की गिरफ्तारी रोकने के निर्देश दिए।

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक पुराने और अहम मामले में सुनवाई करते हुए 71 साल की बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें महिला की अग्रिम जमानत याचिका को बिना सही वजह ठुकरा दिया गया था। कोर्ट ने शिकायतकर्ता वकील दादूराम शुक्ला के खिलाफ 10,000 रुपये का जमानती वॉरंट जारी किया, ताकि उनकी अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके और उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जा सके कि क्यों उन पर जुर्माना न लगाया जाए।

बता दें कि बुजुर्ग महिला पर एक वकील के कहने पर 1971 के एक जमीन के कागज में जालसाजी का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि वे वॉरंट जारी करें और महिला की गिरफ्तारी को रोका जाए। साथ ही, पुलिस के मामले दर्ज करने के तरीके पर सवाल उठाए गए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि यह गलत है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 71 साल की महिला को बिना उचित वजह जमानत नहीं दी, जबकि वह उस जमीन के विक्रेता, खरीदार, गवाह या लाभार्थी नहीं हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को लापरवाही भरा बताया और कहा कि इस पर गंभीर सोचने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वे एफआईआर दर्ज करने के सारे कागजात कोर्ट में पेश करें और बताएं कि इस मामले को क्यों न रोका जाए क्योंकि यह कानून का दुरुपयोग लग रहा है।

मामले की अगली सुनवाई 8 अक्तूबर को होगी
इस मामले में महिला ने 26 मई 2025 को पुलिस के सामने अपनी बात रिकॉर्ड कराई थी। वहीं वकील शुक्ला नोटिस लेने से बच रहे थे, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को कहा कि अगर वे नोटिस लेने से बचें तो गैर-जमानती वारंट जारी कर उन्हें अदालत में लाया जाए। महिला के खिलाफ गोंडा जिले के कोतवाली नगर थाने में 22 जून 2023 को धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज हुआ था।

जानिए पूरा मामला?
गौरतलब है कि पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 27 मई 2025 को महिला की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी क्योंकि वह तय तारीख पर पुलिस के सामने हाजिर नहीं हुई थीं। महिला ने कहा कि वह तब बीमार थीं, इसलिए 19 मई को पुलिस के सामने नहीं जा सकीं, लेकिन 26 मई को अपनी बात रिकॉर्ड करवाई।

एफआईआर में कहा गया है कि 20 अगस्त 1971 को एक फर्जी जमीन का कागज बनाया गया था, जिसे 7 सितंबर 2020 को रद्द कर दिया गया था। एफआईआर में यह भी बताया गया कि महिला, मुख्य आरोपी बृजेश कुमार अवस्थी की सास हैं, जो एक गिरोह का सदस्य है और कई ऐसे फर्जी कागज बनाने में शामिल है।

 

 

 

 

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