‘कानूनी पेशे में सरल भाषा का इस्तेमाल जरूरी, अनजाने उल्लंघनों से बचेंगे लोग’: न्यायमूर्ति संजीव खन्ना

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सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी: ‘कानूनी पेशे में सरल भाषा का इस्तेमाल जरूरी, अनजाने उल्लंघनों से बचेंगे लोग’……

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने रविवार को कानूनी पेशे में सरल भाषा का इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि नागरिक उचित फैसला ले सकें और अनजाने में होने वाले उल्लंघनों से बच सकें।

नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने रविवार को कानूनी पेशे में सरल भाषा का इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि नागरिक उचित फैसला ले सकें और अनजाने में होने वाले उल्लंघनों से बच सकें। यह टिप्पणी उन्होंने ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय वकीलों के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए की।

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि कानून विवादों को सुलझाने के लिए होते हैं, न कि खुद विवादित बन जाने के लिए। उन्होंने कहा कि कानून की सरलता यानी आम आदमी द्वारा समझी जाने वाली भाषा के इस्तेमाल के सवाल पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘क्या कानून को गोपनीय बनाने की जरूरत है? क्या कानून एक पहेली होना चाहिए जिसे हल करने की आवश्यकता है? कानून विवादों को हल करने के लिए होते हैं, न कि खुद विवादित हो जाने के लिए। कानून आम आदमी के लिए रहस्य नहीं होना चाहिए। कानून कानूनी विशेषज्ञों के लिए एक आदेश के रूप में नहीं लिखा गया है। वे हमारे दैनिक जीवन में लगभग हर चीज को लागू और नियंत्रित करते हैं और इसलिए सरल भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। यह नागरिकों को उचित निर्णय लेने और अनजाने में उल्लंघन से बचने में सक्षम बनाता है। यह हमारे फैसलों पर भी समान रूप से लागू होता है।’

उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी और कानूनी पेशों का व्यावसायीकरण अत्यंत चिंता का विषय है। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ‘मुकदमों की बढ़ती लागत, अत्यधिक शुल्क, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी बाधा है, और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय सभी के लिए सुलभ रहे।’ उन्होंने कहा कि पेशे के प्रमुख हितधारकों के रूप में, वकीलों और न्यायाधीशों के लिए आत्मनिरीक्षण करना और करियर विकल्प के रूप में मुकदमेबाजी में घटती रुचि के मुद्दे को संबोधित करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, ‘हम सभी को कानूनी पेशों की कुछ परंपराओं को पुनर्जीवित करने और संरक्षित करने के लिए काम करना चाहिए, जिसका अर्थ है कि अदालत में मुकदमा पहली पसंद का मामला होना चाहिए, न कि अंतिम।’ उन्होंने कहा कि इसका एक कारण युवाओं और युवा वकीलों को कम रिटेनरशिप और वजीफा देना है। न्यायमूर्ति खन्ना ने आगे कहा कि मजबूत, स्वतंत्र और निष्पक्ष बार, कानून के शासन पर आधारित स्वतंत्र और निष्पक्ष समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विवाद मनुष्यों के लिए सामान्य हैं, वैसे ही समाधान भी हैं।