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केंद्र पर निशाना – जी20 के बीच मणिपुर जलने से वैश्विक विश्वसनीयता खो रहा भारत : शशि थरूर

तिरुवनंतपुरम

शशि थरूर ने कहा कि एक तरफ भारत ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ की थीम पर जी-20 बैठकों की मेजबानी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक राज्य जल रहा है, इससे भारत देश दुनिया के सामने अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। बुधवार को उन्होंने कहा कि एक तरफ भारत ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ की थीम पर जी-20 बैठकों की मेजबानी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक राज्य जल रहा है, इससे भारत देश दुनिया के सामने अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि जहां भारत के नेता अपने भाषणों में वसुधैव कुटुम्बकम की बात करते हैं, वहीं ‘जब हमारा अपना ही एक राज्य जल रहा हो तो हमारी क्या विश्वसनीयता होगी? दुनिया भर में जो लोग भारत के बारे में पढ़ेंगे, वे कहेंगे कि सबसे पहले यहां मानवता और सद्भाव की जरूरत है।

दिल्ली के पत्रकार जॉर्ज कल्लिवयालिल द्वारा लिखित ‘मणिपुर एफआईआर’ नामक पुस्तक का कवर जारी करने के बाद शशि थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करूंगा कि कम से कम वैश्विक स्तर पर हमारी विश्वसनीयता को बचाने के लिए कुछ कार्रवाई करें। इस कार्यक्रम का आयोजन केरल मीडिया अकादमी ने किया था। इस समारोह में शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्तियों में सीपीआई (एम) नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास भी शामिल थे।

लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मणिपुर में हिंसा मई में फैली थी, आज उसने भयावह रूप ले लिया है। स्थिति को देखते हुए वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। इस तरह, सेना और राज्यपाल बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कानून और व्यवस्था बनाए रखने पर निर्णय ले सकते हैं। आगे उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य और केंद्र सरकार दोनों की कड़ी आलोचना की और कहा कि भाजपा को सत्ता में रहना है इसलिए वह वहां राष्ट्रपति शासन नहीं चाहते।

इससे पहले शशि थरूर ने नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय का नाम बदलने को लेकर पीएम पर निशाना साधा था और कहा कि प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय करने पर कहा कि यह अफसोस की बात है कि यह नौबत आई। उन्होंने पीएम के आइडिया की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले सभी प्रधानमंत्रियों के कामों को दर्शाने के लिए एक प्रधानमंत्री संग्रहालय बनाने का विचार वाकई काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने कहा कि विचार तो अच्छा है, लेकिन इस प्रक्रिया में नेहरू मेमोरियल का नाम बदलना छोटी हरकत है।