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यूपी के डीजीपी से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों कहा कि तैयारी करिए और फिर अदालत आइये

क़रीब दो साल पहले मैनपुरी में नाबालिग छात्रा की स्कूल परिसर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में दाख़िल की गई विशेष याचिका की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई बल्कि राज्य के पुलिस महानिदेशक को ‘प्रयागराज में ही रुककर और केस की पूरी तैयारी के साथ अगले दिन आने’ का फ़रमान सुनाया.

उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल

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16 सितंबर 2019 को मैनपुरी के एक गांव की रहने वाली कक्षा 11 की छात्रा का शव जवाहर नवोदय विद्यालय के हॉस्टल के कमरे में लटका मिला था.

छात्रा के बैग से एक सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उसने कॉलेज के प्रिंसिपल और एक छात्र पर परेशान करने का आरोप लगाया था. परिजनों ने इस मामले में रेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए भोगांव थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई थी. मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मैनपुरी में प्रदर्शन भी हुए थे.

मैनपुरी के तत्कालीन ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मामले की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति सरकार से कर दी थी जिसके बाद धरना-प्रदर्शन ख़त्म हो गया था. लेकिन संस्तुति के बावजूद सीबीआई को जांच नहीं दी गई और जांच मैनपुरी पुलिस ही करती रही. रेप के आरोप की जांच अभी भी लंबित है.

दो साल बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को हाईकोर्ट में तलब किया. डीजीपी मुकुल गोयल बुधवार को हाईकोर्ट में हाज़िर हुए लेकिन मामले की सुनवाई कर रहे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ के सामने कोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाए. नाराज़ कोर्ट ने डीजीपी को अगले दिन पूरी तैयारी के साथ आने को कहा और तब तक उन्हें प्रयागराज में ही रुकने का भी निर्देश दिया.

क़रीब दो साल पहले मैनपुरी में नाबालिग छात्रा की स्कूल परिसर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में दाख़िल की गई विशेष याचिका की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई बल्कि राज्य के पुलिस महानिदेशक को ‘प्रयागराज में ही रुककर और केस की पूरी तैयारी के साथ अगले दिन आने’ का फ़रमान सुनाया.

16 सितंबर 2019 को मैनपुरी के एक गांव की रहने वाली कक्षा 11 की छात्रा का शव जवाहर नवोदय विद्यालय के हॉस्टल के कमरे में लटका मिला था.

छात्रा के बैग से एक सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उसने कॉलेज के प्रिंसिपल और एक छात्र पर परेशान करने का आरोप लगाया था. परिजनों ने इस मामले में रेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए भोगांव थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई थी. मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मैनपुरी में प्रदर्शन भी हुए थे.

मैनपुरी के तत्कालीन ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मामले की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति सरकार से कर दी थी जिसके बाद धरना-प्रदर्शन ख़त्म हो गया था. लेकिन संस्तुति के बावजूद सीबीआई को जांच नहीं दी गई और जांच मैनपुरी पुलिस ही करती रही. रेप के आरोप की जांच अभी भी लंबित है.

दो साल बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को हाईकोर्ट में तलब किया. डीजीपी मुकुल गोयल बुधवार को हाईकोर्ट में हाज़िर हुए लेकिन मामले की सुनवाई कर रहे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ के सामने कोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाए. नाराज़ कोर्ट ने डीजीपी को अगले दिन पूरी तैयारी के साथ आने को कहा और तब तक उन्हें प्रयागराज में ही रुकने का भी निर्देश दिया.

मैनपुरी के ही रहने वाले 84 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र प्रताप सिंह ने इस मामले में पिछले साल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी और हाईकोर्ट से लड़की के लिए न्याय की मांग की.

महेंद्र प्रताप सिंह ख़ुद वकील नहीं हैं लेकिन इस मामले में पैरवी उन्होंने ख़ुद ही की, किसी वकील की मदद नहीं ली. हालांकि कोर्ट ने ख़ुद बार काउंसिल के चेयरमैन को उनकी मदद करने को कहा.

बीबीसी से बातचीत में महेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं, “मुझे लगा कि लड़की के साथ न्याय नहीं हो रहा है. मुझे लगा कि इसमें कुछ बड़े लोग शामिल हैं और बिना कोर्ट के दख़ल के इस लड़की को न्याय नहीं मिल पाएगा. तो परोपकार का संकल्प संस्कार में पाने के कारण मैंने 2020 में याचिका दाख़िल की. मैंने ही कोर्ट से कहा कि आप डीजीपी को बुलाइए और उनसे सारी जानकारी लीजिए क्योंकि ये अधिकारी और एसआईटी वाले गुमराह करते रहेंगे.”

कोर्ट की पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, “यह मामला मंगलवार यानी 14 सितंबर को कोर्ट में लिस्टेड था. कोर्ट ने पैरवी करने आए वकील और अधिकारियों से कहा कि सारा काम मनमानी तरीक़े से हो रहा है. कोर्ट ने नाराज़गी दिखाते हुए कहा कि आप तो फ़ाइनल रिपोर्ट लगाने की ओर बढ़ रहे हैं. यही किसी पुलिस वाले की लड़की होती तो क्या आप तब भी ऐसी ही जांच करते. एक ग़रीब की लड़की है तो आप अपने मन से सब कुछ कर देंगे, आपने अरेस्ट क्यों नहीं किया. इस तरह की टिप्पणियों के साथ ही शाम चार बजे कोर्ट ने कहा कि डीजीपी को बुलाइए और अगले दिन सुबह दस बजे इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी.”

कोर्ट ने इस मामले की केस डायरी 24 अगस्त को मंगाई थी. मंगलवार को केस डायरी के साथ एसआईटी टीम के सदस्य हाईकोर्ट में हाज़िर हुए थे. साल 2019 में 16 सितंबर को हुई इस घटना की एफ़आईआर 17 जुलाई 2021 को दर्ज कराई गई है. कोर्ट ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि तीन महीने बाद भी गंभीर आरोप होने के बावजूद अभियुक्तों से पूछताछ नहीं की गई.

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वहां मौजूद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आरपीएल श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन तक चली इस कार्रवाई में कोर्ट का बेहद सख़्त रवैया देखने को मिला. अधिवक्ता आरपीएल श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को डीजीपी मुकुल गोयल सुबह दस बजे जब कोर्ट में हाज़िर हुए तो कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए.

आरपीएल श्रीवास्तव का कहना था, “डीजीपी सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे थे तो कोर्ट ने कहा कि आप आज यहीं प्रयागराज में ही रुकिए और सारी जानकारी लेकर कल यानी गुरुवार को फिर से आइए. उनके साथ ही कोर्ट ने कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल और जांच कर रही एसआईटी के सदस्यों को भी हाज़िर रहने का आदेश दिया. कोर्ट ने पीआईल दाख़िल करने वाले महेंद्र प्रताप सिंह की भी काफ़ी तारीफ़ की कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाया. हाईकोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष को भी इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह की मदद करने को कहा.”

इस दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर बेहद तल्ख़ टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पॉक्सो ऐक्ट से संबंधित मुक़दमों में जांच प्रक्रिया अधिकतम दो महीने में पूरी की जाए. अधिवक्ता आरपीएल श्रीवास्तव बताते हैं, “दूसरे दिन दस बजे मुक़दमा फिर शुरू हुआ. डीजीपी को अपने पास बुलाकर उन्होंने लैपटॉप में पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफ़ी दिखाई. बेहद कड़े लहजे में जज साहब ने यह बात कई बार दोहराई कि पैसे लेकर इस मामले को मैनिपुलेट किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बेलगाम पुलिस उन्होंने कभी नहीं देखी. इस मामले में उन्होंने कुछ अन्य मामलों का उदाहरण भी दिया.”

कोर्ट की टिप्पणियों के बाद डीजीपी मुकुल गोयल ने मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय एक विशेष जांच टीम गठित की है और लापरवाही के कारण कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की है. डीजीपी मुकुल गोयल ने मीडिया को बताया, “कुछ अधिकारियों ने शुरुआत में लापरवाही बरती थी जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई है. घटना के विवेचक जो कि इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी हैं, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी और मैनपुरी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया गया है. मैनपुरी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के ख़िलाफ़ भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है.”

कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि जांच की कार्रवाई एक महीने के भीतर पूरी करें और कोर्ट को रिपोर्ट दें. जनहित याचिका दायर करने वाले महेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं, “कोर्ट की इतनी सख़्ती के बावजूद मामले में लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है लेकिन मैं इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं हूं.”

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