प्रधान मंत्री की नजरमें क़्या पत्रकार भी दिमागी नक्सल !
सत्ता के विरोध की आवाज़ को दबाना और कुचलना किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छे लक्षण नहीं हैं। सत्ता के विरोध की आवाज़ को दबाना और कुचलना किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छे लक्षण नहीं हैं। यह तानाशाही का प्रतीक है कि अपने शासक की हर बात को सिर झुका कर सुना जाए, […]
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