‘अंतरिम आदेश नहीं हुआ तो देश जल उठेगा’, CJI सूर्यकांत बोले – हम देख रहे हैं; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई

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भारत के मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. उन्‍हें तत्‍काल प्रभाव से हटाने की मांग की जा रही है. साथ इस पूरे मामले की छानबीन के लिए SIT गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है.

 सुप्रीम कोर्ट सोमवार 5 अक्‍टूबर 2026 को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें चुनौती दी गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एकतरफा रूप से उन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं, जो संवैधानिक रूप से बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग के लिए निर्धारित हैं. सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित मामले की सूची के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई करने वाली है. इस मामले को सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने 29 सितंबर को CJI के समक्ष उठाया था, जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने इसे अगले सप्ताह के लिए लिस्‍ट करने का आदेश दिया था.

याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने की मांग की गई है. इसके साथ ही, इसमें ‘अधिकार-पृच्छा’ (क्वो वारंटो) रिट जारी करने का भी अनुरोध किया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने किस अधिकार के तहत कथित तौर पर निर्वाचन आयोग के नाम पर यह फैसला लिया. याचिका में तर्क दिया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार किसी एक मुख्य चुनाव आयुक्त को नहीं बल्कि चुनाव आयोग को दिया गया है. याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है, जिसमें सामूहिक निर्णय लेने का प्रावधान है और जिन मामलों पर सर्वसम्मति नहीं है, उनका निर्णय बहुमत से किया जाएगा.

याचिका में किस बात का उल्‍लेख

इस याचिका में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से संबंधित समकालीन लिखित कम्‍यूनिकेशन और फाइल नोटिंग पर भरोसा किया गया है, जिन्होंने अक्टूबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर उनकी मंजूरी के बिना लिए गए निर्णयों और कदमों के संबंध में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज की थीं. याचिका में विस्तार से बताई गई आपत्तियां, चुनाव निकाय की मंजूरी के बिना कथित तौर पर जारी किए गए संचार और आदेशों, बैठकों से पहले एजेंडा और बैठकों के बाद के कार्यवृत्त की अनुपस्थिति, बिना मंजूरी के की गई विदेश यात्रा, फॉर्म 6 में परिवर्तन, मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील दायर करने से संबंधित हैं.

चुनाव आयुक्‍तों की चिंताओं का जिक्र

याचिका में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा ‘मतदाता सूची डेटाबेस के क्रमिक केंद्रीकरण’ और चुनाव निकाय के आईटी प्रतिष्ठान के कार्य आवंटन में बदलाव को लेकर उठाई गई चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता ने यह घोषणा करने की मांग की है कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग में निहित शक्तियों का प्रयोग या प्रतिनिधित्व चुनाव निकाय के कार्य के रूप में तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि यह आयोग को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक और वैधानिक ढांचे के अनुसार न हो.