ईरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के मातम का कार्यक्रम चल रहा है, 9 जुलाई को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. ऐसे में हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि जब तक अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चलेगा, तब तक ईरान पर कोई हमला नहीं होगा.
Middle East News: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए राजधानी तेहरान में भारी भीड़ जुट रही है. फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए अंतिम संस्कार समारोह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग और प्रतिनिधिमंडल पहुंच रहे हैं. पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और लाखों शोकाकुल लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अंतिम संस्कार के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे. उन्होंने भरोसा जताया कि समारोह खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू होगा. ट्रंप के इस बयान को क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
लेबनान-वेस्टबैंक में जारी हैं हमले
हालांकि दूसरी ओर मध्य पूर्व में हिंसा थमती नहीं दिख रही है. इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान और गाजा पट्टी में अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं. लेबनान में हुए हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उत्तरी गाजा शहर और जबालिया शरणार्थी शिविर पर हमलों में दो फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबर है. उधर तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोआन ने आरोप लगाया कि इजरायल की कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि तुर्की क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास का समर्थन करने को तैयार है.
बिना मोजतबा खामेनेई के ही अंतिम विदाई
वहीं दूसरी ओर दिवंगत अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे और ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार समारोह में आने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से वे इस समारोह से दूर रहेंगे और खामेनेई के जनाजे को उनका कंधा भी नसीब नहीं होगा. ईरानी विशेषज्ञों के मुताबिक इजरायल के हमलों की आशंका के चलते उन्हें इस कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से नहीं लाया जाएगा.
July 5, 202620:36 IST
खामेनेई की शोक सभा में दुख नहीं, बदला का माहौल
ईरान की राजधानी तेहरान की ग्रैंड मुसल्ला मस्जिद में लाखों लोगों की भीड़ जुटी हुई है. अल-जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया गया कि आमतौर पर शोक सभाओं में काले झंडे लगाए जाते हैं, जो दुख और मातम का प्रतीक होते हैं. लेकिन इस बार सबसे ज्यादा लाल झंडे नजर आ रहे हैं. ईरान में लाल झंडे को बदले का प्रतीक माना जाता है. अधिकारियों ने बताया कि शोक अवधि शुरू होने के बाद से अब तक करीब 20 लाख लोग यहां श्रद्धांजलि देने पहुंच चुके हैं. लोगों का आना अभी भी जारी है. मस्जिद में एक बड़ा सफेद बैनर भी लगाया गया है, जिस पर लिखा है कि दुनिया जान ले, बदला लेना तय है. इसी बीच भीड़ लगातार इजरायल मुर्दाबाद और अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगा रही है.
