Custom Duty on Nepal Border : नेपाल की नई सरकार ने भारत से जाने वाले 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाले सभी सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का आदेश दिया है. इसका ऐलान नेपाल की सिक्योरिटी फोर्स ने भी माइक से करना शुरू कर दिया है. इस आदेश के बाद नेपाल सुरक्षा दल ने माइक से ऐलान करना शुरू कर दिया है.
नई दिल्ली.
पड़ोसी देश नेपाल में जबसे नई सत्ता आई है, प्रधानमंत्री बालेन शाह को लेकर भारत में काफी प्रेम उमड़ रहा है. खासकर युवाओं में बालेन शाह और उनके फैसलों को लेकर पॉजिटिव जोश दिख रहा था, लेकिन अब बालेन ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है. उन्होंने सत्ता संभालते ही भारत के खिलाफ अपना पहला फैसला सुना दिया है. भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले का असर तत्काल दिखना भी शुरू हो गया है. नेपाल के कस्टम विभाग ने भारतीय कारोबारियों के लाखों रुपये के सामान भी सीमा पर जब्त कर लिए हैं.
नेपाल सरकार ने सीमा पार होने वाले कारोबार पर सख्ती करते हुए आदेश जारी किया है कि अब नेपाल से भारत या भारत से नेपाल जाने वाले 100 रुपये से अधिक कीमत वाले किसी भी सामान पर भंसार देना अनिवार्य होगा. नेपाल में सीमा शुल्क को भंसार कहा जाता है. नए आदेश के तहत अब सीमा शुल्क 5 से 80 फीसदी की रेंज में होगा, जिस पर 13 फीसदी का वैट भी लगाया जाएगा. इस आदेश के बाद नेपाल से जुड़ने वाले यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मंच गया है. नेपाल सीमा पुलिस ने बीते 24 घंटे में भैरहवा और सोनौली बॉर्डर पर करीब 15 लाख रुपये के सामान भी जब्त कर लिए हैं.
कहां पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, नेपाल सरकार के इस आदेश का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर दिख रहा है. भारत और नेपाल के बीच दशकों से निर्बाध रूप से कारोबार होता रहा है और वहां से कम कीमत पर सामान लाकर भारतीय कारोबारी लंबे समय से मुनाफा कमाते रहे हैं. बिहार की करीब 378 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से जुड़ती है, लेकिन अब भारतीय सामान के जाने पर यहां कस्टम ड्यूटी वसूली जाने लगी है. भारत के सीमावर्ती इलाकों के कारोबारी अभी तक नेपाल के खरीदारों पर ही निर्भर रहते थे, लेकिन ताजा आदेश से उन्हें साफ तौर पर नुकसान दिखने लगा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, नेपाल सरकार के इस आदेश का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर दिख रहा है. भारत और नेपाल के बीच दशकों से निर्बाध रूप से कारोबार होता रहा है और वहां से कम कीमत पर सामान लाकर भारतीय कारोबारी लंबे समय से मुनाफा कमाते रहे हैं. बिहार की करीब 378 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से जुड़ती है, लेकिन अब भारतीय सामान के जाने पर यहां कस्टम ड्यूटी वसूली जाने लगी है. भारत के सीमावर्ती इलाकों के कारोबारी अभी तक नेपाल के खरीदारों पर ही निर्भर रहते थे, लेकिन ताजा आदेश से उन्हें साफ तौर पर नुकसान दिखने लगा है.
दोनों तरफ के लोगों पर असर
नेपाल सरकार के आदेश का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं, नेपाल के उपभोक्ताओं पर भी होगा. उन्हें 100 रुपये से ज्यादा की कीमत वाले सामान खरीदने पर सीमा शुल्क चुकाना पड़ेगा. जाहिर है कि अब उन्हें इन सामानों के लिए ज्यादा कीमत भी देनी पड़ेगी. नेपाल के लोग ज्यादातर दवाओं, कपड़ों, रेडीमेड गारमेंट, सीमेंट, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रिकल अप्लायंस, बर्तन, खाना और बिस्कुट, केक, सब्जी, मसाले, फल और दूध भारत से खरीदकर ले जाते हैं. इन सभी चीजों पर अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.
नेपाल सरकार के आदेश का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं, नेपाल के उपभोक्ताओं पर भी होगा. उन्हें 100 रुपये से ज्यादा की कीमत वाले सामान खरीदने पर सीमा शुल्क चुकाना पड़ेगा. जाहिर है कि अब उन्हें इन सामानों के लिए ज्यादा कीमत भी देनी पड़ेगी. नेपाल के लोग ज्यादातर दवाओं, कपड़ों, रेडीमेड गारमेंट, सीमेंट, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रिकल अप्लायंस, बर्तन, खाना और बिस्कुट, केक, सब्जी, मसाले, फल और दूध भारत से खरीदकर ले जाते हैं. इन सभी चीजों पर अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.
माइक से हो रहा ऐलान
नेपाल के नेशनल सिक्योरिटी फोर्स ने बाकायदा माइक से ऐलान करना शुरू कर दिया है. यूपी और बिहार दोनों ही सीमा क्षेत्र पर नेपाल के रक्षा दल ने ऐलान कर दिया है कि अब भारत से 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाला कोई भी सामान जाएगा तो उस पर सीमा शुल्क चुकाना पड़ेगा. नेपाल की ओर से एनजीओ अथवा सरकारी संस्थाओं को भी इससे कोई छूट नहीं दी गई है. कारोबारियों का कहना है कि बालेशन शाह की अगुवाई वाली सरकार का जोर अपने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने पर है. यही वजह है कि उन्होंने भारत से आयात होने वाले सामान पर सीमा शुल्क लगाने का फैसला किया है.
नेपाल के नेशनल सिक्योरिटी फोर्स ने बाकायदा माइक से ऐलान करना शुरू कर दिया है. यूपी और बिहार दोनों ही सीमा क्षेत्र पर नेपाल के रक्षा दल ने ऐलान कर दिया है कि अब भारत से 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाला कोई भी सामान जाएगा तो उस पर सीमा शुल्क चुकाना पड़ेगा. नेपाल की ओर से एनजीओ अथवा सरकारी संस्थाओं को भी इससे कोई छूट नहीं दी गई है. कारोबारियों का कहना है कि बालेशन शाह की अगुवाई वाली सरकार का जोर अपने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने पर है. यही वजह है कि उन्होंने भारत से आयात होने वाले सामान पर सीमा शुल्क लगाने का फैसला किया है.
